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रुद्र तांडव — अंधकार 1 by R.

SongGPT
रुद्र तांडव — अंधकार 1 by R. - Dark Trap music cover art

रुद्र तांडव — अंधकार 1

Dark Trap

0:002:59
Lyrics
Description
डमरू की थाप है, गूँजती रात में
हर हवा में है फुसफुसाहट साथ में
ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...
रुद्र बनके आया...
काल को भी खाया...
मैं हूँ परछाई, मौत का साया
जहाँ मैं चलूँ, वहाँ अंत ही आया
शिव का भक्त नहीं, मैं उसका क्रोध हूँ
तीसरा नेत्र, खुला तो संहार ही संयोग हूँ
डमरू की धुन पे, दिल ये धड़कता
हर एक पापी यहाँ खुद से ही डरता
श्मशान की राख, मेरा श्रृंगार
महादेव का नाम… और मैं उसका अंधकार
अंधकार...कार...कार...
ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...
रुद्र बनके आया...
काल को भी खाया...
जटा में गंगा, आँखों में आग
जिसने भी देखा, वही हुआ राख
ना दया, ना क्षमा, बस विनाश की धुन
महाकाल के संग, मैं खुद बना जुनून
भूतों की सेना, मेरे इशारे
हर एक चीख में छुपे इशारे
ये खेल नहीं, ये प्रलय का राज
महादेव का नाम… और मेरा अंदाज
ना बच पाएगा कोई...
जब रुद्र जागेगा...
ॐ नमः शिवाय...
ॐ नमः शिवाय...
तांडव मचाए...
दुनिया मिटाए...
डमरू की थाप से गूँजे जहां
अंधकार छा जाए हर रजत जहां
काल के नगाड़े बजे फिर सुनो
ये तांडव है, जीवन का जुनून