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रावली की पुकार 2 by Payal

SongGPT
रावली की पुकार 2 by Payal - Sad Haryanvi,both vocals music cover art

रावली की पुकार 2

Sad Haryanvi,both vocals

0:003:24
Lyrics
Description
(मुखड़ा)
रावली बोले है, सुन ले सरकार,
ना सुनवाई, ना कोई विचार।
पूल डूबा, सपने भी डूबे,
बच्चे फंसे हैं कीचड़ की लूट में।
(अंतरा 1)
बरसात आई, रास्ता गया,
स्कूल की घंटी फिर दूर रह गया।
बस्ता भीगा, मन भी टूटा,
मासूम बचपन रोज यहां रूटा।
(अंतरा 2)
किसी के बाप की बेटी बैठी,
किसी के बेटे की दुनिया लुटी।
पढ़ ना पाए, बढ़ ना पाए,
ये दलाल पहले अपना पेट भर पाए।
(अंतरा 3)
कागज़ों में पूल बन गया रे,
जमीन पे बस गड्ढा रह गया रे।
सिस्टम का खेल, दलाली की चाल,
रावली बना बेबस, बिल्कुल बेहाल।
(अंतिम पंक्ति)
निखिल रावली चीखे जोर,
"अब ना सहेंगे, कर देंगे शोर!"
बिजनौर की ये आवाज है प्यारे,
हर गांव की यही आज़ाद पुकार है।
(मुखड़ा)
रावली बोले है, सुन ले सरकार,
हम ना मांगें सोना, ना कोई त्योहार।
बस रास्ता दे दे, एक पूल बना दे,
हमारे बच्चों की सुबह तो सजा दे।
---
(अंतरा 1 – बरसात और स्कूल की पीड़ा)
बरसात में जब पानी भर जाता,
स्कूल का सपना डूब के रह जाता।
कंधे पे बस्ता, आँखों में डर,
कीचड़ से भरे रास्ते, कांपता हर घर।
छोटी-सी बिटिया जो पढ़ना चाहती,
माँ का आँचल भीग-भीग के सुबकती।
बेटे का मन अब किताबों से दूर,
पूल नहीं तो जिंदगी भी अधूरी जरूर।
---
(अंतरा 2 – गांव की कहानी, दलालों का खेल)
कहने को जिला है बिजनौर हमारा,
पर रावली जैसे गांव हैं सहारा।
कई बार आया सर्वे वाला,
हर बार निकला कोई नया दलाला।
"पैसे आएंगे, काम शुरू होगा",
but पहले दलाल का घर भर होगा।