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राम दरबार की महिमा 2 by Shammi

SongGPT
राम दरबार की महिमा 2 by Shammi - classical,male vocals music cover art

राम दरबार की महिमा 2

classical,male vocals

0:002:31
Lyrics
Description
दोहा
बाल हनू नृत्यन लगे, प्रकट प्रेम रस छाप ।
देखि राम मुसकान जब, मिटे जगत के ताप ॥
चौपाई
कूदत फाँदत करत सलोना ।
भूलि गए सब दुःख दुःखोना ।।
करत बिनोद सखान समेता ।
प्रेम मगन सेवक नवलेता ।।
राम निहारि रह्यो हियँ लाये ।
दीरघ काल बाद हँसि जाये ।।
अश्रु भर्यो दृग हास सुहावा ।
दरबार मगन भयो हरषावा ।।
लखन भरत अरु शत्रुघन भाई ।
देखत छवि हर्षे मन लाई ।।
माता पिता समेत दरबारा ।
भक्त नृत्य देखत सुख सारा ।।
गावत बाजत सुर सरगामा ।
प्रकट भयो दरबार विशाला ।।
भक्त नचावत प्रेम अपारा ।
राम बस्यो सेवक उर धारा ।।
दोहा
रामहि देखि नाचत सुत, पुलकित भए जनकसुत ।
जग मग भयो दरबार, छायो प्रेम उदित ॥