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रात की ख़ामोशी (Night's Silence) by Xhechdbsdnx

SongGPT
रात की ख़ामोशी (Night's Silence) by Xhechdbsdnx - Hindi Sad Ballad With Hip-Hop music cover art

रात की ख़ामोशी (Night's Silence)

Hindi Sad Ballad With Hip-Hop

0:003:09
Lyrics
Description
रात की खामोशी... सब कुछ सुन लेती है...
जो दुनिया नहीं समझ पाती... वो मेरे कमरे की दीवारें समझती हैं...
जहरे पे हसी रखता हूँ... सब से मैं मुस्कुराता हूँ...
दिल के सारे तूटे टुकडे... खुदी रोज छुपाता हूँ...
कोई पूछे कैसे हो... बस इतना कह देता हूँ...
मैं ठीक हूँ... बोल कर फिर अंदर ही भिखर जाता हूँ...
भीड में रहकर भी यारो... कितना तन्हा रहता हूँ...
हर दर्द अपने सीने में... चुप चात मैं सहता हूँ...
जिसे दुनिया मेरी खुशी समझे... वो बस एक नकाब है...
मेरी सची कहानी तो... रातों का हिसाब है...
मेरे कमरे की ये दिवारे... सब राज मेरे जानती है...
हर तोटा सपना, रांसू, हर खामोशी पहचानती है...
दुनिया से जो छुपा लिया... वो इन से कभी छुपा नहीं...
इन छार दिवारों के आगे... मैं कभी जूठा बना नहीं...
रात की खामोशी पूछती है... आज फिर क्यूं रोए हो...
दिल कहता है धीरे से... अपने ही तो खोए हो...
खोए हो तकीये पर गिरते हैं... आँसू मेरी कहानी कहते हैं...
जो लवस कभी ना बोच सका... वो खामोशी ही लिखते हैं...
अकेला बैठा कमरे में... खुद से बाते करता हूँ...
हर याद के तूटे शीशे में... अपना चेरा पढ़ता हूँ...
मोहबत भी अधूरी निकली... सपने भी बिखर गए...
जिनने अपना समझा था... वो भी कहीं बदल गए...
हर रात आँखे नम होती है... पर सुबा मुस्कुराना है...
दुनियां को लगता मस्बूत हूँ... बस यही दिखाना है...
अंदर से कितना टूटा हूँ... ये कोई देख नहीं पाता...
दिल हर रोज चिलाता है... पर चेहरा कुछ नहीं बताता...
जायद किसी दिन कोई आए मेरी खामूशी भी सुन पाए...
बिना पूछे मेरे दर्ध को बस अपना सायसास दिलाए...
आआ... आआ...
रात की खामूशी गवा है... मैं कितना तूट चुका हूं...
हस्ते छेहरे के पीछे कितनी बार भिखर चुका हूँ...
मेरे कमरे की दिवारे मेरी हर धडकन जानती है...
मैं बहर से हसता हूँ पर अंदर रोज मरता हूँ...
अगर कभी कोई पूछे तुम सच में कैसे हो...
मैं बस इतना कहूँगा थोड़ा सा प्यार नहीं...
थोड़ी सी समझ और किसी अपने का साथ चाहिए...
जब सारी दुनियां सो जाती है...
मेरी तनहाई जागती है...
और मेरे कमरे की दिवारे...
आज भी मेरी खामोशी सुनती है...