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राजपुरोहित की शान — कानोड़िया 2 by kumbh

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राजपुरोहित की शान — कानोड़िया 2 by kumbh - folk,male vocals music cover art

राजपुरोहित की शान — कानोड़िया 2

folk,male vocals

0:003:34
Lyrics
Description
(Verse 1)
कानोड़िया की मिट्टी में, बरगद के नीचे सवेरा,
राजपुरोहित खड़े हैं, हाथ में थामे धूप का तेरा।
सेवड़ जागीरदार की छवि, दीवारों पर जैसे चित्र बनें,
शहनाई उठे खेतों से, बाजरे की पगडंडी चमकें।
(Chorus)
राजपुरोहित की शान, कानोड़िया का मान
सेवड़ जागीरदार — हम सबका ये गान
(Verse 2)
दिवाली की रातों में, मंदिर की घंटी बोलती है,
चौपाल में कहानी वही, पीढ़ियाँ जो कहती हैं।
लाल टोपी, मिट्टी की सूजी रोटी, आँखों में ठहराव,
मेले की रंगत में गूँजती, उनकी मेहनत का आसाव।
(Chorus - Call & Response)
(Lead) राजपुरोहित की शान…
(Response softly) कानोड़िया का मान…
(Lead) सेवड़ जागीरदार…
(Response) हम गाएँ ये गान…
(Verse 3)
सुबह की आरती में धुंआ, बैलों की घंटियाँ दूर,
भजन की लय में बस्ता, पुरखों का दिया फुरूर।
नाम नहीं बस रिवाज़ों से, हस्ती बनती यहाँ रोज़,
खेत, कुआँ, चौपाल की बातें, त्यौहारों की मीठी रोज।
(Bridge)
एक रात जब तारे थक कर गिरे, और आँचल में ठंडी हवा आई,
उन्होंने दिए थे अपने हाथ, थकान में भी पूजा न छोडाई।
कहानी नहीं सिर्फ़ सम्मान — त्याग की वो एक याद है,
धरती ने सींचा उनका पौरुष, और पानी में नाम सदा थाह है।
(Chorus - Stripped then Rise)
(soft) राजपुरोहित की शान, कानोड़िया का मान
(gradual build) सेवड़ जागीरदार — उठा ये पुराना गान
(full) राजपुरोहित की शान, कानोड़िया का मान
सेवड़ जागीरदार — हम सबका ये गान
(Outro)
यह गीत है पहचान का, बरगद के नीचे सजी दास्ताँ,
राजपुरोहित, सेवड़ जागीरदार — कानोड़िया की ही शान।