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राखी का वो दिन 2 by Krishna

SongGPT
राखी का वो दिन 2 by Krishna - Folk,both vocals music cover art

राखी का वो दिन 2

Folk,both vocals

0:003:28
Lyrics
Description
(अलाप – धीमा, भावुक सुर में)
राखी का वो दिन फिर से आया है,
तेरी कलाई आज फिर सूनी रह जाएगी...
मैं दूर हूँ बहना, मजबूरी है ये,
पर रेशम की डोरी याद बहुत आएगी...
---
(अंतरा 1)
तेरे बिना कौन सताए अब मुझे,
कौन लड़के हँसाए अब मुझे...
वो गुड्डे-गुड़ियों की शादी कहाँ,
वो छत पे पतंगें उड़ाए अब मुझे...
(भावुकता बढ़ती है)
तेरे हाथ की वो राखी रखी है संभाल के,
भीग गई है वो भी तेरी यादों के हाल में...
---
(कोरस – दर्द भरी धुन)
बहना ओ बहना... तू ही तो है मेरी दुनिया,
तेरे बिना ये जीवन अधूरा सा लगे ना...
तेरी हँसी में मेरा बचपन बसा है,
तेरे बिना दिल कभी भी ना लगे ना...
---
(अंतरा 2)
माँ के आँचल से छुपा लेते थे तुझको,
पापा की डाँट से बचा लेते थे तुझको...
आज तू बड़ी हो गई है बहना,
पर बचपन की बातें बहुत याद आती हैं बहना...
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(कोरस दोबारा – धीमा और भावुक)
बहना ओ बहना... तू ही तो है मेरी ताक़त,
तेरे प्यार में ही तो थी ज़िन्दगी की राहत...
भाई तेरा दूर सही, दिल से जुड़ा है,
तेरे हर दर्द में वो तेरे संग खड़ा है...
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(अंत में – धीमा fade out)
राखी की डोरी... बस यादों में रह गई,
तेरे बिना बहना... ये राखी अधूरी रह गई...