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रंगीन चलन 1 by taiyab

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रंगीन चलन 1 by taiyab - क्लासिक music cover art

रंगीन चलन 1

क्लासिक

0:002:56
Lyrics
Description
नये को नये से मिलाने का चलन देखा है,
चमकते सितारों से सजा ये गगन देखा है।
हर शख़्स यहाँ अपने ही रंग में खोया है,
हमने मेले में भी तन्हा सा मन देखा है।
कब, कहां और कैसे मिलना है अदब से,
नजाकत से होते चार, नयन देखा है।
रंगीन चलन में डूबा ये जहाँ,
कभी आग में जल, कभी बारिश का पानी।
बिखरे रिश्तों की ये कहानी सुन,
हर पल में छुपा दर्द और निशानी।
कभी धूप में जलना, कभी छांव में ठहरना,
जिंदगी का यही रंगीन चलन देखा है।
जो गिरा है वही उठकर आगे बढ़ा है अक्सर,
हमने ठोकर में भी इंसां का जतन देखा है।
कभी फूलों की तरह खिलता था रिश्ता अपना,
अब उसी शाख पे बिखरता हुआ चमन देखा है।
रंगीन चलन में डूबा ये जहाँ,
कभी आग में जल, कभी बारिश का पानी।
बिखरे रिश्तों की ये कहानी सुन,
हर पल में छुपा दर्द और निशानी।
वक़्त के साथ बदल जाती है चाहतें अक्सर,
हर मोड़ पर यहीं बदलता चलन देखा है।
दुनिया की दौलत जिसने बटोरी,
मरके अपने साथ कफ़न भी बोझ देखा है।
रंगीन चलन में डूबा ये जहाँ,
कभी आग में जल, कभी बारिश का पानी।
बिखरे रिश्तों की ये कहानी सुन,
हर पल में छुपा दर्द और निशानी।
अपनी किस्मत पर नाज़ क्यों न करे तैयब,
जब तुझमें ही रहबर, मुकद्दर, सनम देखा है।