या अल्लाह की रहमत by Reshma

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या अल्लाह की रहमत by Reshma - Arabic Style Na'At music cover art

या अल्लाह की रहमत

Reshma

Arabic Style Na'At

0:004:48
Lyrics
Description
रेगिस्तान की खामोशी में एक सदा उठती है।
या अल्लाह की धुन से हर रेत भी सजती है।
जब अन्धेरों ने घेरा था, वक्त भी थंसा गया।
तेरे नाम का सूरज हर सिम्त चामकता गया।
ना तलवार से ना ताकत से दिल जीते तूने, एक रह्मत से दुनिया के रस्ते बदले तूने।
जहां नफरत की आंधी थी वहां करम बहा दिया। सुखी रूहों की जमीद पर नूर तूने सजा दिया।
या अल्लाह तिरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशनी दी। हर तूटे दिल को नई उमीद की बूं बरसाई।
या अल्लाह तिरे नाम से मुसाफिर भी राह पा गया। जो खाली था वही अब तिरे नूर से भर गया।
धूप में पसीना बहता था जब हर ठकन थी बाती।
तेरी दूआ की लोरी ने दिल को सुकूं जताई। मागर मच की निगाहों में भी अब आशा खिल उठी।
तेरी रह्मत ने हर गम की दीवारे तोड़ी। ना तलवार से ना ताकत से दिल जीते तूने एक रह्मत से दुनिया के रस्ते बदले तूने।
जहां नफरत की यांदी थी वहां करम बहा दिया। सुखी रूहों की जमीन पर नूर तूने सजा दिया।
या अल्लाँ तेरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशिनी दी। हर तूटे दिल को नई उमीद की बूं बरसाई।
या अल्लाँ तेरे नाम से मुसाफिर भी राह पा गया। जो खाली था वही अब तेरे नूर से भर गया।
आज भी जब कोई तूटा तेरे दर पे आ जाता है।
खाली जोली वाला भी यहां भर के ही जाता है।
ना ये जीत किसी मुल्क की ना हार किसी इंसान की ये तो फते है रह्मत की तेरे ही एहसान की।
या अल्लाँ तेरी रह्मत ने जग को थोड़ी रोशनी दी। हर तूटे दिल को नई उमीद की बूं बरसाई।
या अल्लाँ तेरे नाम से मुसाफिर भी राह पा गया। जो खाली था वही अब तेरे नूर से भर गया।
या अल्लाँ का जो नूर दिल में उतर जाता है। वही बनदा हर मुश्किल में सरोचा उठाता है।