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मैं शहीदों का चेला हूँ 1 by Lale

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मैं शहीदों का चेला हूँ 1 by Lale - patriotic music cover art

मैं शहीदों का चेला हूँ 1

patriotic

0:003:16
Lyrics
Description
[अंतरा 1 – दर्द भरे सुर में]
जब फांसी पे झूले वो तीन परवाने,
काँप उठी थी सल्तनत, डर गए थे ज़माने।
हँसते-हँसते जान दी जिन वीरों ने,
उनके खून की सुगंध है आज भी हवाओं में。
[कोरस – जोश और गर्व के साथ]
मैं शहीदों का चेला हूँ,
Harsh Chaudhary Sadabad से निकला हूँ।
भगत, राजगुरु, सुखदेव की राह पे,
जिंदगी को भी सौगंध समझा हूँ。
[अंतरा 2 – प्रेरणा भरी आवाज़ में]
कभी किताबों में पढ़ा था इंकलाब,
आज सीने में वही जलता है ख्वाब।
वो जो मिट गए मुस्कुराते हुए,
मैं उनका नाम ज़ुबां पे बसाए हुए。
[कोरस दोहराएं]
मैं शहीदों का चेला हूँ,
Harsh Chaudhary Sadabad की मिट्टी का लाड़ला हूँ।
जो शहीदों ने छोड़ी थी चिंगारी,
उसे ज्वाला बना के आज भी जलता हूँ。
[ब्रिज – भावुक लेकिन मजबूत लहजे में]
माँ कहती है बेटा, ये राह कठिन है,
मैं कहता हूँ माँ, ये ही तो मेरी पहचान है।
न कोई लालच, न कोई डर बाकी,
सिर झुके सिर्फ तिरंगे के आगे बाकी。
[अंतिम कोरस – पूरी ताक़त के साथ]
मैं भगत सिंह का सपना हूँ,
राजगुरु का जज्बा, सुखदेव की तपस्या हूँ।
मैं हूँ Harsh Chaudhary Sadabad,
शहीदों की राह का वो वादा हूँ!
[आखिरी पंक्ति – शांत, आत्मीय सुर में]
जब तक सांसें हैं, ये गीत गूंजेगा…
"इंकलाब ज़िंदाबाद" कभी न सूनेगा।