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मैं टूटा तारा हूँ by Krishna

SongGPT
मैं टूटा तारा हूँ by Krishna - Classical music cover art

मैं टूटा तारा हूँ

Classical

0:003:32
Lyrics
Description
सनाटा है दिल में, शोर है दिमाग में, गुम हुई दिशाएं, अधेरी हर शाम है।
जो थी मेरी पहचान, वो नौकरी भी छूटी, किसमत ने भी मुझसे कैसी ये जंग लूटी।
मैं तूटा तारा हूँ, दिखरा हर किनारा हूँ, अब कैसे संबलूँ, मैं बे सहारा हूँ।
हर उम्मीद मरी, हर खाब जला है, ये कैसा दौर है, बस हम ही मिला है।
जिसपे किया था भरोसा, वो यार भी पराया हुआ, वफा के बदले सिर्फ धोका ही कमाया हुआ।
अश्कों में बैगई सारी वो कस्में, अब दिल है खाली, बस बची है रस्में।
मैं तूटा तारा हूँ, दिखरा हर किनारा हूँ, अब कैसे संबलूँ, मैं बे सहारा हूँ।
हर उमीद मरी, हर खाब जला है, ये कैसा दौर है, बस हम ही मिला है।
घरवालों से भी वो अन्बन हो गई है, रिश्टों की दिवार अब तूटी सी रही है।
अकेला खरा हूँ इस भीर भरे शहर में, कोई नहीं अपना हर मोर पे कहर है।
मैं तूटा तारा हूँ, दिखरा हर किनारा हूँ, अब कैसे संबलूँ, मैं बे सहारा हूँ।
हर उमीद मरी, हर खौब जला है, ये कैसा दौर है, बस हम ही मिला है।
मगर ये रात है, इसे कट जाना है, तूटा हूँ तो क्या, फिर से बन जाना है।
उठूँगा, लडूँगा, फिर से मैं चलूँगा, ये वक्त बुरा है, इसे भी बदलूँगा।
हाँ, इसे भी बदलूँगा।
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