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माँ की छांव - एक अनकही कविता 1 by mohan

SongGPT
माँ की छांव - एक अनकही कविता 1 by mohan - Ballad,Female vocals music cover art

माँ की छांव - एक अनकही कविता 1

Ballad,Female vocals

0:003:42
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
चाँद की चाँदनी में तेरी परछाई है,
सूरज की पहली किरण में तेरी मुस्कान है।
माँ, तेरे हाथों की वो मिट्टी की खुशबू,
मेरे हर दर्द की दवा, मेरी जन्नत की दुआ।
(कोरस)
माँ की छांव, जैसे बरसात की हवाएं,
जो छू जाए दिल को, और बहा दे तन्हाइयाँ।
तेरे बिना ये जिंदगी अधूरी, जैसे रंग बिना तस्वीर,
माँ, तू है मेरा आसमान, मेरा सवेरा, मेरा नूर।
(अंतरा 2)
तेरी आँखों में समंदर की गहराई है,
तेरी बातें फूलों की तरह महकती हैं।
तूने सींचा है मुझे अपने प्यार की बारिश में,
माँ, तेरे आंचल की छाँव में खिलता मेरा जहाँ।
(कोरस)
माँ की छांव, जैसे बरसात की हवाएं,
जो छू जाए दिल को, और बहा दे तन्हाइयाँ।
तेरे बिना ये जिंदगी अधूरी, जैसे रंग बिना तस्वीर,
माँ, तू है मेरा आसमान, मेरा सवेरा, मेरा नूर।
(ब्रिज - अनूठा हिस्सा)
सुन, जब तू थक जाती है,
मैं तेरे आँसुओं को अपनी तान में बुनता हूँ।
तेरी हर नर्म मुस्कान मेरी दुनिया को सजाती है,
माँ, तेरी दुआओं में मेरी हर खुशी चमकती है।
(कोरस - दोहराव)
माँ की छांव, जैसे बरसात की हवाएं,
जो छू जाए दिल को, और बहा दे तन्हाइयाँ।
तेरे बिना ये जिंदगी अधूरी, जैसे रंग बिना तस्वीर,
माँ, तू है मेरा आसमान, मेरा सवेरा, मेरा नूर।
(आउट्रो - भावुक समापन)
माँ, तेरी ममता की वो अमिट कहानी,
मेरे दिल के हर कोने में बसी है ज़िंदगानी।
तेरे प्यार के सागर में डूबा रहता हूँ मैं,
माँ, तू मेरी पहचान, मेरी सबसे बड़ी दुआ है।