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महावीर और अपूर्वा गाई की प्रवासी कथा 1 by Vinay

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महावीर और अपूर्वा गाई की प्रवासी कथा 1 by Vinay - folk,male vocals music cover art

महावीर और अपूर्वा गाई की प्रवासी कथा 1

folk,male vocals

0:003:33
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
एक प्रवासी बस चली, धूप-छाँव के बीच,
महावीर की छाया में, अपूर्वा की गीत के सीन।
टूटी राहों के मोड़ पे, जज़्बातों के संग सजा,
हर कदम पर छुपी है, एक अनकही दास्तां।
(कोरस)
महावीर की हिम्मत, अपूर्वा की आवाज़,
बसे हैं दिल में जैसे, जादू के ये ताज़।
सपनों की इस बस में, चलती है कहानी,
प्रवासी दिलों की, अनसुनी रवानी।
(अंतरा 2)
अपूर्वा गाई, उस दर्द की लय,
जिसमें बहती है, आंसुओं की परछाई।
महावीर जैसे जुझते, हर तूफान से लड़ते,
पर भीतर के जख्मों को, गीतों में सजाते।
(ब्रिज)
रात की चादर तले, उलझे हुए सवाल,
कहीं खोया कहीं पाया, एक अधूरा हाल।
महावीर की ताक़त में, अपूर्वा का जादू,
मिलके गूंजे ये कहानी, हर दिल के बादू।
(कोरस)
महावीर की हिम्मत, अपूर्वा की आवाज़,
बसे हैं दिल में जैसे, जादू के ये ताज़।
सपनों की इस बस में, चलती है कहानी,
प्रवासी दिलों की, अनसुनी रवानी।
(आउट्रो)
बस रुके नहीं, चलता रहे सफ़र,
महावीर की तरह, अपूर्वा की तरह।
ये गीत बने अमर, हर दिल की जुबां,
प्रवासी बस की आवाज़, जो ना हो कभी थम।