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भीड़ में खोया भारत 1 by Narayan

SongGPT
भीड़ में खोया भारत 1 by Narayan - भावुक,both vocals music cover art

भीड़ में खोया भारत 1

भावुक,both vocals

0:003:29
Lyrics
Description
हर चेहरा भागा-भागा सा है, हर आँख में सपना टूटा है,
भीड़ है लाखों की लेकिन… भारत कहीं छूटा है।
न माटी की वो गंध रही, न तिरंगे की पहचान,
बस जाति, धर्म, पार्टी के झगड़े… बस इनका ही गुणगान。
भीड़ के हाथों बिक गया अब गाँव का वो बूढ़ा पीपल,
जहाँ कभी बैठ राम कथा सुनी जाती थी सरल।
अब न बच्चा मैदान में खेले, न गीत गूंजते गली में,
हर दिल जैसे घुटा हुआ हो, सांसें उलझी कड़ी में।
देश की आज़ादी का क्या होगा, जब लोग ही आज़ाद नहीं,
भीड़ है — लेकिन चेतना नहीं, कोई भी आबाद नहीं।
हर कोई बस 'मैं' में उलझा, 'हम' का अर्थ मिटा गया,
जिसने भारत जोड़ा था, वो 'मनुष्यता' सड़ गया।
कभी मंदिर-मस्जिद साथ रहे, अब दीवारें बोलती हैं,
कभी किताबें दोस्त थीं, अब नफरतें खोलती हैं।
भीड़ में बच्चा खोता था, अब इंसान खो रहा है,
भारत है नज़रों के सामने — फिर भी कहीं खो रहा है।
स्वतंत्रता की लौ बुझेगी नहीं — पर धुआँ बहुत है चारों ओर,
भूख, बेकारी, डर, बेमानी — चीरते हैं हर कमजोर।
कभी राम, कभी रहीम, कभी नेता, कभी सिस्टम —
हर नाम से खेली जाती अब 'भारत' की किस्मत!
किसी चौराहे पर एक बच्चा चिल्ला रहा था, “माँ!”
पर माँ न मिली, न मिली भीड़ में पहचान।
अब मैं पूछता हूँ तुम सबसे —
क्या भारत भी उस बच्चे जैसा नहीं...?