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बैकबेंच का बादशाह 2 by Song

SongGPT
बैकबेंच का बादशाह 2 by Song - देसी ठाठ,both vocals music cover art

बैकबेंच का बादशाह 2

देसी ठाठ,both vocals

0:003:28
Lyrics
Description
[भूमिका – बोल के साथ चालू हो रहा है]
न किताबों में दिल लगता था,
न सवालों में जान थी,
क्लास के कोने में जो बैठा था,
असल ज़िंदगी तो उसी की शान थी।
(चलो अब शुरू करें – ताल बजाओ!)
[अंतरा 1]
क्लास का वो आख़िरी बेंच — मेरा अपना सिंहासन,
जहाँ बैठते ही बन जाता था, मेरा सारा शासन।
टीचर बोलें दिनभर, पर कान मेरे बंद थे,
सपनों की दुनिया में उड़ते — मेरे ख़्वाब चाँद थे।
किताबें खुलीं कम, पर आँखें हमेशा खुली थीं,
ज़िंदगी की गिनती नहीं, हर सांस में मस्ती घुली थीं।
यूनिफ़ॉर्म सिलवटों भरा, लेकिन चाल में घमंड था,
जिसे सबने नाकारा कहा, असल में वो अनोखा छंद था。
[मुखड़ा / कोरस]
मैं हूँ बैकबेंच का बादशाह,
जहाँ से शुरू होती है असली राह।
ना अंकों का डर, ना डाँट की परवाह,
मेरे जैसे होते हैं ज़माने से अलबेला सच्चा गवाह।
[अंतरा 2]
भोजनावकाश मेरा उत्सव होता,
कैंटीन मेरा दरबार था।
जहाँ सामने वाले घबराते थे,
वहाँ मेरा मन बेपरवाह था।
नकल नहीं करता था, पर समझ अपनी गहरी थी,
हर मज़ाक में छुपी बात — वो असली समझ मेरी थी।
सवालों का जवाब नहीं, पर सवालों से सवाल था,
हर चुप्पी में जो बोल जाए — वो मेरा ही हाल था।
[मुखड़ा दोबारा]
मैं हूँ बैकबेंच का बादशाह,
जहाँ से शुरू होती है असली राह।
ना अंकों का डर, ना डाँट की परवाह,
मेरे जैसे होते हैं ज़माने से अलबेला सच्चा गवाह।
[सेतु – धीमे सुर में]
हर क्लास में नहीं चाहिए होता पहला नंबर,
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