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बेवकूफों के खेल का अंत 2 by I

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बेवकूफों के खेल का अंत 2 by I - हिप-हॉप music cover art

बेवकूफों के खेल का अंत 2

हिप-हॉप

0:003:22
Lyrics
Description
(इंट्रो)
सुना है तुमने, ₹400 की ये चालाकी,
पेपर लिखवाना, जैसे हो कोई बड़ी साज़िश।
अरविंद, आस्था, नाम नहीं, पर फेम बड़ा,
लोगों को बेवकूफ बनाना, इनका पैशन बड़ा。
(वर्स 1)
₹400 लेकर, करते हैं सबको धोखा,
पेपर में झूठ के जाल बुनते, करते हैं मौक़ा।
गलतियाँ छुपाते, कभी सच नहीं मानते,
बेवकूफ बनाकर, अपनी नाक कटवाते。
लोगों की उम्मीदों से खेलते हैं बर्बाद,
पर ये भूल गए, सच की होती है बात।
झूठ के महल में बैठ के करते हैं राज,
पर सच्चाई की आग में होगा उनका अंत आज।
(कोरस)
ये बेवकूफी का खेल, अब बंद होना चाहिए,
₹400 की चाल, सबके सामने लानी चाहिए।
समाज जागो, परिवार सुनो, सच को अपनाओ,
ऐसे धोखेबाजों से दूरी बनाओ।
(वर्स 2)
नाम बड़ा, पर दिल का काला अंधेरा,
झूठ बोले बिना, नहीं चलता ये सवेरा।
लोगों को बेवकूफ बनाकर करते हैं खेल,
पर अब वक्त है, सच को बोलने का मेल।
कभी ₹400 लेकर, कभी कम में सौदा,
पर असली कीमत है, सच्चाई का जोड़ा।
झूठ से मिली जीत, होती है झूठी बात,
पर सच्चाई की जीत, करती है सबको मात。
(ब्रिज)
ना कोई बहाना चलेगा, झूठ की कोई छाया नहीं,
सत्य की तलवार से, हर नकाब हटाया नहीं।
अरविंद-आस्था की चालें अब खत्म होंगी,
सच्चाई की रोशनी में, सब झूठी कहानियाँ खो जाएंगी。
(कोरस)
ये बेवकूफी का खेल, अब बंद होना चाहिए,
₹400 की चाल, सबके सामने लानी चाहिए।
समाज जागो, परिवार सुनो, सच को अपनाओ,
ऐसे धोखेबाजों से दूरी बनाओ।
(आउट्रो)
यूनिवर्सिटी की गलियों म