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बारिश की रात 2 by Supriyo

SongGPT
बारिश की रात 2 by Supriyo - rap-rock music cover art

बारिश की रात 2

rap-rock

0:003:06
Lyrics
Description
(verse)
मैं बैठा हूँ अकेला, यादें बुनता हूँ,
इस उदासी में, अपने लैब को सोचता हूँ।
एक सन्नाटा है, ये रोशनी की कमी,
दिल में है दर्द, जैसे बहे बारिश की बूँदें गहरी।
(chorus)
बारिश की रात है, मन मेरा बस टुटा है,
यादों की छाया में, जीने का उत्साह खोता है।
अकेलेपन का आलम है, जैसे फुहार बिखरती,
मेरे दिल में चल रही बारिश, वो हर लम्हा कहरती।
(verse)
वो दिन थे जब हम साथ थे, हंसते थे गाते,
अब सब कुछ यादों में, ये खामोशी हमें भटकाते।
यहाँ खिलाफ़ हैं हवाएँ, जैसे मैं यहाँ पर दुश्मन,
ये रोज़ की निराशा में, जीने का नहीं कोई यत्न।
(chorus)
बारिश की रात है, मन मेरा बस टुटा है,
यादों की छाया में, जीने का उत्साह खोता है।
अकेलेपन का आलम है, जैसे फुहार बिखरती,
मेरे दिल में चल रही बारिश, वो हर लम्हा कहरती।
(outro)
इस बूँदों के बीच मैं सोता नहीं,
लैब की यादों में खुद को खोता नहीं।
दिल की गहराई में ये बारिश भी एक साथी,
पर जिंदगी से पूछूँ, क्या है तू सच्ची?!