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बरसात की धुन 1 by ফাজলামি

SongGPT
बरसात की धुन 1 by ফাজলামি - Bollywood,both vocals music cover art

बरसात की धुन 1

Bollywood,both vocals

0:003:01
Lyrics
Description
अजीब सा सुकून मिलता है, जब बारिश है आती
शायद इसीलिए, वो काले बादल की है जमाती
छज्जे पे टपकती बूंदें, जैसे आँसुओं का हो मेला
ये बारिश का पानी, मन को करता अकेला, पर देता है सहारा
(Chorus)
हाँ, शायद इसीलिए, वो गड़गड़ाहट बादलों की
और ये बारिश की धुन, सुकून की है साथी
लगता है, अंदर का रोना, बन गया था भाप
वही भाप बन बादल, अब बरस रहा है बेहिसाब
(Verse 2)
मन के भीतर जितना भी था, वो गहरा दर्द
सब बनके धुआँ, ऊपर उठा, ये है मेरा मर्ज
इसलिए ही तो वो छज्जा, भीगा हुआ है इतना
मेरी आँखों का पानी, बनके बारिश लौटा कितना
(Chorus)
हाँ, शायद इसीलिए, वो गड़गड़ाहट बादलों की
और ये बारिश की धुन, सुकून की है साथी
लगता है, अंदर का रोना, बन गया था भाप
वही भाप बन बादल, अब बरस रहा है बेहिसाब
(Bridge)
जब आँखें मेरी रोती थीं, कोई ना था पास
आज ये बूँदें गिरती हैं, देती हैं दिलासा
हर टपकती बूँद में, मेरी कहानी है छिपी
कैसे दर्द की लहरें, अब शांत हैं बिखरी
(Outro)
हाँ, वो छज्जा, जो भीगा है, मेरे आँसुओं से
मेरी अंदर की बेचैनी, अब बरसती है यूँ
एक अजीब सी शांति, है मिलती इस पल
जब बादल बरसते हैं, और मेरा मन है हलचल।