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बरसात की ख़ुशबू 2 by Anand

SongGPT
बरसात की ख़ुशबू 2 by Anand - Qawwali,male vocals music cover art

बरसात की ख़ुशबू 2

Qawwali,male vocals

0:003:39
Lyrics
Description
[verse 1]
ये हवाये तेरे होठों को छूकर बह रही हैं
ख़ुशबू जैसे इस मौसम में घुल रही हैं
परिंदों की महफिल आसमा में झूम रही है.
बरसाते भी सजने संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं..
[ corus ]
बरसाते भी सजने संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं..
[verse 2]
मौसम बदलते जा रहे हैं...
ये रात.. ये दीन ढलते जो रहे हैं ..
kब देखा था तुम्हें वो तारीख याद नहीं..
आंखें तेरे दीदार को तरसने लगी हैं..
[Corus]
बरसाते भी सजने ..संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं..
[ bridge ]
तुम हो हीरा कोहिनूर..
जन्नतो की सबसे हसी हुर..
हम तो तेरे सादगी के घायल हैं
जान लेती तेरी ये पायल है
ये गली..ये शहर .. ये ज़माना नहीं
इस जहां से उस जहां तक तू तो मशहूर है..
बरसाते भी सजने ..संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं..
[Verse 3]
पर्वतों ने ओढ़ली हवाओं की ओढ़नी
आसमा में फिर से खिल उठी हैं चांदनी
हीरे मोतियों के ये गहने,
तेरे गले के हार बनने की रखते हैं हसरतें..
[ Corus]
बरसाते भी सजने संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं..
ये हवाये तेरे होठों को छूकर बह रही हैं
ख़ुशबू जैसे इस मौसम में घुल रही हैं
परिंदों की महफिल आसमा में झूल रही है.
बरसाते भी सजने संवरने लगी है
जब से तेरे आँगन में बरसने लगी हैं