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प्रेम की नैया by Ani

SongGPT
प्रेम की नैया by Ani - Hindi Cinematic Sufi-Folk music cover art

प्रेम की नैया

Hindi Cinematic Sufi-Folk

0:007:54
Lyrics
Description

[आलाप] आ… आ… किसी शायर ने क्या खूब कहा है— प्रेम की दरिया में तुम डुबकी लगा नहीं पाओगे, उसकी तेज़ धार लहरों को संभाल नहीं पाओगे, अगर डूब गए तो कोई मसला नहीं, पर बच गए तो जी नहीं पाओगे… आ… क्योंकि प्रेम को दूर से देखना आसान है, उसमें उतरना नहीं… [अंतरा 1] चाँद को देखकर चाँद से मोहब्बत करना आसान है, रातों की तन्हाई में उसके लिए जलना मुश्किल है। हाथों में हाथ मिले तो कह देना प्रेम नहीं, हाथ छूट जाए फिर भी दुआ देना प्रेम है। हँसी में साथ देना किसे नहीं आता यहाँ, आँखों में आँसू हों तो ठहरना प्रेम है। [प्री-कोरस] राम को देखा… वनवास नहीं देखा, कृष्ण को देखा… विरह का एहसास नहीं देखा, शंकर को देखा… उनकी तपती राह नहीं देखी, बस प्रेम की तस्वीर देखी… उसकी कीमत नहीं देखी। [मुखड़ा] प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… लहरों से डरना क्या, दिल तो किनारे छोड़े हैं। प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… डूबे तो भी अपना है, बचे तो भी किस्से हैं। हो… ओ रे मनवा… धीरे-धीरे चलना रे… ये राह फूलों की नहीं, काँटों से भी मिलना रे… प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… [अंतरा 2] ठोकरों से मेरा भी कुछ पुराना नाता है, हर गिरने ने मुझको चलना सिखाया है। जिसे मिला वो कहता है— प्रेम बड़ा हसीन है… जिससे बिछड़ा पूछो, उसने क्या-क्या खोया है। किसी की याद में जागना, फिर सुबह मुस्कुराना, अपने हिस्से का दर्द दूसरे से छुपाना… ये भी प्रेम है… [प्री-कोरस] प्रेम में पाना ही सब कुछ नहीं होता, कभी किसी के होकर भी उसके नहीं होते। कभी मिलकर भी दूरियाँ रह जाती हैं, कभी बिना मिले ही ज़िंदगियाँ जुड़ जाती हैं। [मुखड़ा] प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… लहरें चाहे तेज़ हों, दिल फिर भी इसके साथ है। प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… जो दिल से उतर गया, वो फिर कहाँ किनारे है। हो… ओ रे मनवा… आज ज़रा गा लेने दे… जिसे दिल ने अपना माना, उसको खुदा बना लेने दे… [सूफ़ियाना ब्रिज] मत कहना— "मैंने प्रेम किया…" अगर उसकी खुशी में अपनी खुशी नहीं देखी। मत कहना— "मैं उसका था…" अगर उसके दर्द में अपनी रात नहीं देखी। प्रेम सिर्फ़ मिलना नहीं… प्रेम तो वो है— जब सामने वाला दूर हो… और दिल फिर भी कहे— "खुश रह…" [बिल्ड-अप] आ… फिर चाहे राह में सौ ठोकरें आएँ… आ… फिर चाहे अपने ही सपने टूट जाएँ… दिल कहे— चल… क्योंकि प्रेम डरकर किया नहीं जाता… प्रेम… जिया जाता है। [महाकोरस] प्रेम की नैया है! राम के भरोसे है! दिल ये दीवाना है! प्रेम के भरोसे है! हँसना है तो हँसेंगे, रोना है तो रो लेंगे, जिस राह में तू मिले, उस राह पे चल लेंगे! प्रेम की नैया है! राम के भरोसे है! डूबे तो कहानी है, तैरे तो निशानी है! हो… ओ रे मनवा! आज खुलकर गा रे! जिसको प्रेम मिला है, उसका शुक्र मना रे! हो… ओ रे मनवा! कल का किसने देखा है! आज जो दिल में प्रेम है, आज ही उसे जी ले रे! [अंतिम सूफ़ियाना हिस्सा] किसी ने पूछा— "प्रेम में इतना दर्द क्यों है?" मैंने कहा— "क्योंकि जहाँ कीमत नहीं होती, वहाँ प्रेम भी कहाँ होता है…" राम का त्याग… कृष्ण का विरह… शंकर की तपस्या… इनकी कहानी देखकर प्रेम करना बहादुरी नहीं… इनकी पीड़ा समझकर भी प्रेम में उतर जाना… शायद… यही प्रेम है। [अंतिम मुखड़ा] प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… अब लहरें चाहे जितनी हों, दिल तो इसके भरोसे है… प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… डूब गया तो प्रेम मिला… और बच गया तो… ज़िंदगी भर उसका किस्सा है… [आउट्रो] आ… आ… प्रेम की नैया है… राम के भरोसे है… और ये दिल… अब भी… प्रेम के भरोसे है…