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प्रकृति के सुर 2 by Shree

SongGPT
प्रकृति के सुर 2 by Shree - folk,both vocals music cover art

प्रकृति के सुर 2

folk,both vocals

0:002:40
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
नीले गगन का छांव सुहाना,
बोल रहा है मन मयूरा।
पत्तों की वो धीमी सरगम,
जैसे बजता हो कोई तानपूरा।
(कोरस)
प्रकृति की गोद में सब कुछ मिलता,
सुकून भी, प्रेम भी, जीवन भी खिलता।
इन हवाओं में है कोई गीत बसा,
हर झरना बोले जैसे राग बसा।
(अंतरा 2)
भोर की किरणें जैसे हो चूम रही,
हर शाख को सोने में गूंथ रही।
तितली की रंगीन उड़ान में,
छिपी है कोई मधुर जुबान में।
(कोरस दोहराएं)
प्रकृति की गोद में सब कुछ मिलता,
सुकून भी, प्रेम भी, जीवन भी खिलता।
इन हवाओं में है कोई गीत बसा,
हर झरना बोले जैसे राग बसा।
(अंतरा 3)
चाँदनी रात की चुप्पी कहती,
तारों में भी कहानी रहती।
धरती माँ की ममता को देखो,
हर कण में उसकी छवि बहती।