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प्रकृति की बात 1 by Om

SongGPT
प्रकृति की बात 1 by Om - Peaceful Acoustic / Folk Melody,both vocals music cover art

प्रकृति की बात 1

Peaceful Acoustic / Folk Melody,both vocals

0:003:07
Lyrics
Description
(मुखड़ा / Chorus)
चलो चलें उन वादियों में, जहाँ हवा गुनगुनाती है,
जहाँ हर पेड़ कहता है कुछ, और नदी मुस्कुराती है।
ज़मीन की हर साँस में, इक सच्ची दुआ सी आती है,
प्रकृति की बातों में, रूह मेरी खो जाती है। 🌳
(अंतरा 1)
सूरज की पहली किरण जब
पत्तों पे चमकती है,
ओस की बूँदों में जैसे
खुशबू सी महकती है।
वो मिट्टी की सौंधी खुशबू,
बरसातों की पहली बात,
तेरे जैसी लगती है —
शुद्ध, सच्ची, और बेपरवाह।
(अंतरा 2)
बहती हवा कुछ कहती है,
सावन की रिमझिम बहती है।
चाँदनी रातें पूछती हैं,
कब आएगा फिर से वो पल।
जब हम बिना फ़ोन के बैठे थे,
धरती की बातों में खोए थे,
न कोई शोर, न कोई चालाकी —
बस पेड़ों की लोरी में सोए थे।
(मुखड़ा दोहराव)
चलो चलें उन वादियों में, जहाँ दिल साँस लेता है,
जहाँ हर पंछी गीत बन जाए, और मन बस उड़ता है।
प्रकृति के रंगों में रंग जाए ये दिल मेरा,
हर फूल की हँसी में, हर झरने की सदा में —
मेरा रब नज़र आता है। 🌺