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नृसिंह का अमर ज्योति by Kabir

SongGPT
नृसिंह का अमर ज्योति by Kabir - Indian Classical Fusion music cover art

नृसिंह का अमर ज्योति

Indian Classical Fusion

0:003:19
Lyrics
Description
नृसिंहः, नृसिंहः, शक्ती का सागर है, हर अंदकार को तुने चीर दिया।
भृदे में जोति जलाए, अनंत प्रकाश है।
जय जगदीश हरे, नृसिंह की आराधना।
श्रीन सिहाय नम्हा, शर्ण अगतों के द्वार, भक्ती के सर में, गूझे अमर प्यार।
नमस तेरी सिहाय, धारन करो मम मन, प्रहलाद की प्रीत में, खिल उठा हर क्षण।
हिरन्यक शिप भयभीत, तेरा तेज निराला, शीला टंक नखों से, तूटे दहक उठे बाला।
निसीह, निसीह, शक्ती का सागर है, हर अंधकार को तूने चीर दिया।
विदे में जोती जलाए, अनंत प्रकाश है, जै जगधीश हरे, निसीह की अराधना।
पीतो नसीह परतो सर्वक्त्र तेरा रूप, कर कमल वरेनाख अदभूत तेरा श्रिंग।
दलित हिरन्यक शिपूतन तेरा प्रचंड रंग, तू है अभयका सागर भक्तों के संग।
शर्णागतों के तू अभयका सागर है, तेरे चर्णों में मिले सुक्षांती का नागर है।
कैश्वन हरी तुझे जै जै कार गाए, निसीह भगवान हम सब को बचाए।
निसीह निसीह शक्ती का सागर है, हर अंधकार को तुने चीर दिया।
हरदे में जोती जलाए, अनंत प्रकाश है।
जै जगधीश हरे निरसीह की याराजना।
शिलाटंक नखों की गुंज में दहकती जॉलासी, भयभीत हिरन्यक शिपू तेरा स्वरूप देखा।
असुरों के समहारक मानवता के प्रहरी, निसीह भगवान जग का अचल धूरी।
निसीह निसीह अमर जोती का दीप है। हर दिल में बसा अनंत प्रेम की छाप है।
जै जगधीश हरे गीत ये गाओ सब मिल, निसीह की महिमां में जीवन हो खिल।