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धूप जैसा छोरा 2 by AI Composer

SongGPT
धूप जैसा छोरा 2 by AI Composer - फolk music cover art

धूप जैसा छोरा 2

फolk

0:003:22
Lyrics
Description
(इंट्रो – भारी आवाज में)
माटी में पला, धूप में जला,
जो झुके ना वक्त से, वो छोरा चला。
(कोरस)
धूप जैसा छोरा हूं, छांव मुझे रास ना आए,
जो भी आँख दिखाए, मैं उसे घूर जाऊं काजल बनाए।
ना डर में जिया, ना डर में मरा,
मैं गांव का छोरा, आग में घुला。
(अंतरा 1)
कुर्ता सफेद, आंखें सुरमा,
बात करे तो दिल कांपे गरमा गरमा।
न्याय की बात हो या हाथ की चाल,
दोनों में बराबर रखूं हल्की सी ताल।
साफा लहरावे हवा से पहले,
नाम ऐसा – गांव में चले हवाले।
ना बटन खोले, ना ढिंढोरा पीटे,
फिर भी जलवे छोरे के खुद ही दीखे।
(कोरस दोहराव)
धूप जैसा छोरा हूं, झुलसा दूं बातों से,
सीधा चलता हूं, पर कांप उठे जातों से।
ना किसी जात का झंडा हूं,
ना किसी भीड़ का बंदा हूं।
मैं तो मिट्टी का बेटा हूं –
जिसका सीना फौलादी जंटा हूं।
(अنتरा 2)
चौपालों में किस्से मेरे,
तेवर मेरे – जैसे बादल गहरे।
ना दोस्ती सस्ती, ना दुश्मनी सीधी,
मेरी जुबान – तलवार जैसी तीखी।
बापू ने बोला – "झुकना मत",
और मां की दुआ – “टूटना मत।”
वो दोनों बातें आज भी साथ हैं,
इसलिए आज भी सीना तान के बात है।
(आउट्रो – धीमी आवाज में थमते सुर के साथ)
kागज़ पे नहीं, पत्थर पे लिखा हूं,
जो भी देखे, बोले – "जिंदा आग का टिका हूं।"
धूप जैसा छोरा हूं, छांव मुझे क्या समझे?
मैं तो वो साया हूं – जो तपती धूप में भी थमे।