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धागों में सुकून 1 by 6x

SongGPT
धागों में सुकून 1 by 6x - Folk,female vocals music cover art

धागों में सुकून 1

Folk,female vocals

0:003:38
Lyrics
Description
कई धागों में उलझकर ही
कई धागों में उलझकर ही तो सुकून दे जाता है मुझे
सर्दियों में एहसास जब ठंड का हो जाता है मुझे
तुझे ओढ़कर ही तो
तुझे ओढ़कर ही तो महसूस होता है गर्मी का
जब तक गले खूब अच्छे से ना लगाऊं तुझे
ऐ तुझ पर सवार हुई तो
ऐ तुझ पर सवार हुई
तो फिसलती चली गई
चांद को मचलते हुए देखा
तुझ में सितारों को भी टिमटिमाती हुई
झोंका हवा का आया
झोंका हवा का आया
मैंने कहा जरा सा रुक जा थम जा
जरा सा तू रुक जा थम जा
तेरे शोर में भी बहती चली गई
तेरे आगोश में आवाज खिलखिलाहट की आई
तेरे आगोश में आवाज खिलखिलाहट की आई
हाथों को तेरे थाम कर आगे बढ़ती ही चली गई
ओ बलखाती हुई महबूब मेरी
अरे ओ बलखाती हुई महबूब मेरी
चुलबुली सी नगीन
तेरे एक-एक हरकतों पर मैं फिदा होती चली गई
कहते हैं कि सुबह होते ही हम चाहिए
कहते हैं कि सुबह होते ही हम चाहिए
और कहते हैं हमें साथ थोड़ा कुछ चाहिए
और हम कहते हैं हमें तो
और हम कहते हैं
हमें तो सुबह दोपहर शाम रात हर वक्त चाहिए
शाही नाम तो है ही हमारे साथ
शाही नाम तो है ही हमारे साथ
बस सुबह से शाम साथ चाहिए
तू नहीं खूबसूरत है
तू नहीं खूबसूरत है
कहते हैं सिर्फ एक मकाम ही तो है
कभी फूलों से कभी पत्तों से
कभी अपनी खुशबू से तो कभी बर्फों की चादर ओढ़कर
सारे रंगों में ढालकर तू सजती सवरती रहती है
एक बार जो दिल से रूह से एहसास कर ले
एक बार जो तुझे दिल से और रूह से एहसास कर ले
पूरी कायनात को यकीन हो