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धन्य माँ लक्ष्मी 2 by Radhe

SongGPT
धन्य माँ लक्ष्मी 2 by Radhe - Folk,female vocals music cover art

धन्य माँ लक्ष्मी 2

Folk,female vocals

0:003:57
Lyrics
Description
शुभ कमलों पर विराजतीं, श्रीहरि की अर्धांगिनी।
सकल विश्व को देने वाली, स्नेह, समृद्धि की रागिनी।
स्वर्ण समान ज्योति वाली, शांति की अनुगामिनी।
धन, वैभव की अधिष्ठात्री, सृष्टि की पालक वंदिनी。
चरणों में जिनके सुधा, कुबेर भी कर अर्घ्य चढ़ाए।
संकट में जो नाव बनीं, हर एक भक्त को पार लगाए।
दया की सजीव मूर्ति, मधुर मुस्कानों की रानी।
सत्य, श्रद्धा, सेवा की, सुगंधित ज्योतिर-जलधि वाणी。
विपत्तियों में दीप बनीं, अंधकार हर लेती हो।
हर घर में मंगल भर दो, सबकी झोली देती हो।
प्रभु नारायण की प्रिया, तुम्ही जगत की रचना हो।
धूप, दीप, नैवेद्य बनो, जब मन से अर्चना हो。
कमलनयन, कमलवर्णा, कमल पे जो बिराजें।
संकल्पों की साधना में, सफलता तुम साजें。
स्वप्नों में आकर जो कहें, “भय नहीं, मैं साथ हूँ।”
हर पीड़ा की राह में, अटल आशा की बात हूँ。
प्रातः तारे जब चमकें, तेरा नाम जपे मन।
द्वार खिले जब भाग्य के, तेरा रूप हो कारण।
विप्र, निर्धन, बालक हों या राजा के सुत प्यारे।
सबको एक समान देखें, ऐसी मातु तुम्हारी नजारे。
जहाँ दीप जलते तुझ बिन, वहाँ प्रकाश अधूरा।
जहाँ तेरा वास न हो, वहाँ जीवन ही सूना।
सागर मंथन से निकलीं, पर अंतः करुणामयी।
दान, तपस्या, यज्ञ की भी, सार बनीं स्वयंमयी。
धन दौलत हो या हो ज्ञान, तुमसे ही उत्पन्न हुआ。
जग को गति देने वाली, तुमसे हर जीवन जुड़ा。
मन की रिक्तता को भर दो, माँ अपने नेत्रों से。
भक्तों को न