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दीवारों की सिसकियाँ by Tz

SongGPT
दीवारों की सिसकियाँ by Tz - ballad music cover art

दीवारों की सिसकियाँ

ballad

0:004:17
Lyrics
Description
कल रात जब चांदनी ने छुपा लिया आसमां, मैंने अपने दर्दों को दीवारों पे लिखा जबां।
बिन आवाज के बस खामुशी का आलम था, हम सोते रहे, पर दीवारें चुपके से रो रही थी, आसू से कहा, मेहफिल में नाना पर वो बोले, तन्हाई में मैं बसता हूँ हर दफा।
छुपा के ये जाखं, दिल के कुने में छुपाए, तुहें याद कर के ये दीवारें भी सहं जाती हैं।
दीवारों की सिसकियां, मेरी तन्हाई की दासतां, बदलते हुए रिश्ते खो गयें जैसे कोई आसमा, मुहाबत के जखमों में दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवारें मेरी तन्हाई से कहती रही।
मिठी बातें जो थीं, अब जहर सी लगती हैं, हुसन के उन जालों में कई आशिक जलते हैं। पत्थरों से भी किया था प्यार, नादानी थी मेरी, जो आज तकलिफ देते हैं।
कभी थे मेरी जिन्दगी के साए, गिंती में कमजोर, जखम बेहिसाब हैं, फिर भी दिल में जली उमीद की एक लाउरों।
यादें आती हैं चुपके से, बरसात की बूंदों जैसे, दिल के कोने में छिपी अधुरी कुछ दासतां।
दीवारों की सिसकियां, मेरी तनहाई की दासतां, बदलते हुए रिष्टे खो गए जैसे कोई आसमां।
महाबत के जखमों में दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवार मेरी तनहाई से कहती रहीं।
कभी जो छेहरे थे बास, आज दूर ही सही, उनकी आदों का साया, दिल को छू जाता है कहीं।
महाबत का मतलब, अब ना समझ पाए हम, जखमों के इस सफर में, खुद को खोते जाते हैं हम।
दीवारों की सिसक्कियां, मेरी तनहाई की दासतां, बदलते हुए रिष्टे खो गए जैसे कोई आसमान।
महाबत के जखमों में दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवार मेरी तनहाई से कहती रहीं।
ये रात फिर से मैंने अपने सारे घम लिख डाले, हम सोते रहे, और दीवार फिर से रोती रहीं।