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दीवारों की सिसकियाँ by Tz

SongGPT
दीवारों की सिसकियाँ by Tz - ballad music cover art

दीवारों की सिसकियाँ

ballad

0:004:24
Lyrics
Description
खो गए जैसे कोई आसमाँ। मोहब्बत के जख्मों में, दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवारें, मेरी तन्हाई से कहती रहीं।
खो गए जैसे कोई आसमाँ। मोहब्बत के जख्मों में, दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवारें, मेری तन्हाई से कहती रहीं।
खो गए जैसे कोई आसमाँ। मोहब्बत के जख्मों में, दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवारें, मेरी तन्हाई से कहती रहीं।
खो गए जैसे कोई आसमाँ। मोहब्बत के जख्मों में, दर्द भी साथ बढ़ता गया, और ये दीवारें, मेری तन्हाई से कहती रहीं।
मीठी बातें जो थीं, अब जहर सी लगती हैं।
हुसन के उन जालों में, कई आशिक जलते हैं।
पत्थरों से भी किया था प्यार, नादानी थी मेरी।
जो आज तकलीफ देते हैं, कभी थे मेरी जिंदगी के साए।
गिनती में कमजोर जखम बेहिसाब हैं, फिर भी दिल में जली उमीद की एकलाब।
यादे आती हैं चुपके से बरसात की बूंदों जैसे दिल के कोने में, छिपी अधूरी कुछ दासतां।
दिवारों की सिसकियां, मेरी तनहाई की दासतां।
बदलते हुए रिष्टे खो गए जैसे कोई आसमां।
मोहबत के जखमों में दर्द भी साथ बढ़ता गया।
और ये दिवारे मेरी तनहाई से।
कभी जो चेहरे थे पास आज दूर ही सही, उनकी आदों का साया दिल को छू जाता है कहीं।
मोहबत का मतलब न समझ पाए हम जक्मों के सफर में खुद को खोते जाते हैं।
दिवारों के सिसकियां, मेरी तनहाई की दासतां।
बदलते हुए रिश्टे खो गए जैसे कोई आसमा।
मोहबत के जक्मों में दर्द भी साथ बढ़ता गया।
और ये दिवारे मेरी तनहाई से कहती रहीं।
कल रात, फिर से मैंने अपने सारे घम लिक डाले।
हम सोते रहें और दिवारे फिर से रोती रहीं।