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त्रिशूलधारी की हुंकार 2 by MUTE BOX

SongGPT
त्रिशूलधारी की हुंकार 2 by MUTE BOX - Indian Classical,both vocals music cover art

त्रिशूलधारी की हुंकार 2

Indian Classical,both vocals

0:003:33
Lyrics
Description
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो।
त्रिशूल उठाए जो तांडव करे,
प्रलय की गूंज में ब्रह्मांड डरे।
शिवशक्ति का वह अद्भुत स्वरूप,
महाकाल का जो महाप्रभु रूप!
नीलकण्ठः शिवः शंभुः, सर्वेशः परमेश्वरः।
हलाहल पिया पर विष उनको जला ना सका,
काल के भाल पर उनका ही चिह्न रहा।
डमरू की ध्वनि जब गगन में गूंजती,
युगों की परिधि खुद उलटती-बदलती।
रुद्रः क्रुद्धो भवेत् संहाराय!
जब रुद्र गरजते, तो सृष्टि कांपती,
तीनों लोकों में हलचल मचती।
अधर्मियों के लिए वह अग्नि समान,
धर्मरक्षकों के लिए शिव वरदान!
शिवोऽहं शिवोऽहं, नित्यं सत्यं सनातनः।
जो अघोरी भी हैं, जो सन्यासी भी हैं,
जो महाकाल भी हैं, जो संहारक भी हैं।
गंगा को शीश में संभाल रखा,
चिता के भस्म को गले लगाया。
ॐ नमः शिवाय, नित्यमेव भवाय!