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तेरे बिना 1 by AKSH

SongGPT
तेरे बिना 1 by AKSH - Ballad,Male vocals music cover art

तेरे बिना 1

Ballad,Male vocals

0:003:44
Lyrics
Description
जिस दिन तू गया, वो दिन अब भी रुका है,
घड़ी चलती है, पर वक़्त कहीं ठहरा-सा है।
कमरे की दीवारें तुझसे सवाल करती हैं,
और मैं… मैं अब भी कोई जवाब नहीं ढूंढ पाया हूँ।
तेरा नाम अब भी सांसों में है,
ना चाहूँ तब भी हर धड़कन तुझे पुकारती है।
कभी सोचता हूँ — क्या तू भी मुझे याद करती है?
या तेरा दिल अब किसी और की धुन में धड़कता है?
तेरी हँसी, जो पहले राहत देती थी,
अब यादों में कांटे जैसी चुभती है।
तेरे जाने के बाद ज़िंदगी नहीं रुकी,
पर जीना... वो किसी कर्ज़ की तरह भारी हो गया।
हर सुबह जब सूरज उगता है,
उसकी रौशनी में भी तेरी परछाई दिखती है।
खिड़की के पास रखे तेरे पुराने कपड़े
अब भी महकते हैं — जैसे तू यहीं कहीं है।
तेरी चूड़ियों की खनक अब नहीं सुनाई देती,
पर हर सन्नाटा उसकी गूँज बन गया है।
मैं अकेला बैठा रहता हूँ,
कभी तेरा नाम बुदबुदाता हूँ,
कभी ख़ुद से लड़ता हूँ —
क्यों तू चली गई, बिना कुछ कहे?
तेरे दिए हुए उपहार अब भी सजे हैं शेल्फ पर,
जैसे तेरा इंतज़ार कर रहे हों।
वो किताबें, जिनके पन्नों में तूने फूल रखे थे,
अब सूख चुके हैं, पर तेरी ख़ुशबू अब भी बाकी है।
तेरे जाने से सिर्फ़ तू नहीं गई,
मैं भी वहीं ठहर गया — अधूरा, बिखरा हुआ।
तेरे बिना ये कमरा मकान बन गया,
जहाँ दीवारें बोलती नहीं, सिर्फ़ सुनती हैं।
कभी तेरा फ़ोन आता था — “क्या खाया?”,
अब रिंगटोन भी मुझसे डरती है।
तेरे मैसेज की टोन अब भी सेव है,
पर वो स्क्रीन अ