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तेरा नाम — एक हिंदी ग़ज़ल 2 by AI Composer

SongGPT
तेरा नाम — एक हिंदी ग़ज़ल 2 by AI Composer - Hindi Ghazal,Male Vocals music cover art

तेरा नाम — एक हिंदी ग़ज़ल 2

Hindi Ghazal,Male Vocals

0:003:43
Lyrics
Description
(मक़्ता / Matla)
चाँद ने पूछा मेरी तन्हाई से — किसका ये परवाना, तेरा नाम।
हवा ने छेड़ी मेरी खामोशी को — हर झुठली दास्ताँ में, तेरा नाम।
(शेर 1)
शब के सन्नाटे में जले हुए दिए, दिल के कोने में नूर पड़ा — तेरा नाम।
आँखों की परछाइयों ने जब भी मुस्कुराया, हर इक ख़्वाब मुसाफिर बोला — तेरा नाम।
(शेर 2)
काग़ज़ पे जब भी उकेरी मैंने तन्हाई, हर लफ़्ज़ से उठी खुश्बू — तेरा नाम।
बहारें भी पूछें मेरी राहों से, किसको बुलाती है ये फिज़ा — तेरा नाम।
(शेर 3)
आशिक़ी की महफ़िल में जब रोए ज़माना, मेरे अश्कों ने कहा इक दवा — तेरा नाम।
रात की ख़ामोशी में गूँजी जो सदा, उस पूरे शहर ने फक्त़ गुनगुनाया — तेरा नाम।
(हुक़्म / Chorus — ताल में दोहराव के साथ)
ये सारा आलम मेरी साँसों में बसा, एक ही दावत, एक ही रीति, तेरा नाम।
हर धड़कन, हर साँस, हर शब-ओ-हयात की ख्वाहिश — बस इक लफ़्ज़ पे ठहरी — तेरा नाम।
(शेर 4)
तू पास हो तो फिज़ा भी गीत गाए, तेरे ही ख्याल से महका दुनिया का हर काम — तेरा नाम।
तू दूर हो तो चांद भी कहीं खो जाए, मेरी तन्हाई से उठे वही नाम — तेरा नाम।
(शेर 5)
कदमों के निशाँ मिट जाएं राहों से, पर दिल की किताब में छोड़ा साया — तेरा नाम।
हयात की हर सुबह जब तुझे याद करे, बन जाए हर दुआ का सवेरा — तेरा नाम।
(ब्रिज — लहज़ा नर्म, थोड़ा विस्तार)
नूर-ओ-रंग की इन गलियों में, तेरी आहट ने दी सबको एक पहचान।
मेरे अल्फ़ाज़ों की चादर में जब तू सोया, हर बेनाम श