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तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है 2 by RAHUL

SongGPT
तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है 2 by RAHUL - Hip Hop,male vocals music cover art

तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है 2

Hip Hop,male vocals

0:002:53
Lyrics
Description
[Hook]
तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है, तुम्हारी उड़ान ग़लत,
अपनों को छोड़ के भागे, पर यहाँ की जान ग़लत,
क्यों दोष दो निज़ाम को, या सियासत के नाम को,
आईना देखो, गुनहगार हो तुम, ये इल्ज़ाम ग़लत!
[Verse 1]
कभी निज़ाम ने दबाया, कभी हुकूमत ने लुटाया,
पर आज़ादी को पचास साल हुए — क्या तुमने कुछ बनाया?
ना स्कूल खड़े किए, ना फ़ैक्ट्री की नींव रखी,
बस टिकट कटाई बेंगलुरु की, वहीं रोज़ी रोटी पकड़ी।
तुम कहते हो — “यहाँ काम ही कहाँ?”
पर सवाल ये है — “तुमने बनाया क्या यहाँ?”
जिन गलियों में खेले थे, आज भी वही धूल,
तुम्हारे भाग जाने से बढ़ा ये भूख का मूल।
[Hook]
तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है, तुम्हारी उड़ान ग़लत,
अपनों को छोड़ के भागे, पर यहाँ की जान ग़लत,
क्यों दोष दो निज़ाम को, या सियासत के नाम को,
आईना देखो, गुनहगार हो तुम, ये इल्ज़ाम ग़लत!
[Verse 2]
बेंगलुरु में तुम CEO के सपने बुनते हो,
पर अपने शहर में बिजली का खम्बा भी क्यों न गढ़ते हो?
रैज़र्वेशन लिया, जॉब ली, डिग्री ली, स्कॉलरशिप खाई,
पर लौट के आए? नहीं! बस बेंगलुरु की रौनक बढ़ाई।
जो मेहनत तुम वहाँ करते हो, यहाँ लगाते,
तो खेतों में सोना उगता, कारखाने सजाते।
पर तुम्हें आसान रास्ता पसंद है — भागो और चमको,
मगर घर की सड़कों पर बच्चे आज भी नंगे पाँव दम तोड़ो।
[Hook]
तुम्हारी चुप्पी ही क़सूर है, तुम्हारी उड़ान ग़लत,
अपनों को छोड़ के भागे, पर यहाँ की जान ग़लत,
क्यों दोष दो निज़ाम को, या सियासत क