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ढोल नगाड़ों की धुन में 2 by Naresh

SongGPT
ढोल नगाड़ों की धुन में 2 by Naresh - राजस्थानी लोक संगीत music cover art

ढोल नगाड़ों की धुन में 2

राजस्थानी लोक संगीत

0:003:03
Lyrics
Description
सतरंगी पगड़ी उड़ती घुम्मड़ के संग,
ढोल नगाड़े बज रहे, गूंजे हर अंग।
सुबह से शाम तक, ये उत्सव का रंग,
मां की हंसी में बसे हैं अनमोल संग।
चील की आवाज़, गुड़ की मिठास,
घाघरा फड़फड़े, छेड़े ढोल की ताल।
धूप में झूल रहे हैं सारे परिवार,
कहते हैं, "यहाँ हर दिल है अपना यार।"
ढोल नगाड़ों की छम-छम, रंगीनी पगड़ी,
छेड़े सुर ताल, बहे खुशियों की नदी।
माटी की खुशबू में घुला एक साज,
राजस्थानी जश्न, झूमे हर नामाज़।
मॉं की गोद में सपनों की गठरी,
संग जुटे आवाज़ें, बहे प्रेम की गढ़री।
नैनों में चमकती रेत की चमक,
धड़कन में बसी हुई मिट्टी की महक।
सरसों के खेतो में झूलता सावन,
बाजे ढोल, बजती मंजीरे का सावन।
हर वारिस का दिल ये गीत गाए,
मन गढ़े रिश्तों के सुर सिमट आए।
ढोल नगाड़ों की छम-छम, रंगीनी पगड़ी,
छेड़े सुर ताल, बहे खुशियों की नदी।
माटी की खुशबू में घुला एक साज,
राजस्थानी जश्न, झूमे हर नामाज़।
पुरखों की यादें भी छेड़ती हैं ताल,
धरती से जुड़ा हर इक सवाल।
मिल के मनाएं ये रंगीनी शादी,
हर सुर में बसा है प्रेम का माद्दा।
ढोल नगाड़ों की छम-छम, रंगीनी पगड़ी,
छेड़े सुर ताल, बहे खुशियों की नदी।
माटी की खुशबू में घुला एक साज,
राजस्थानी जश्न, झूमे हर नामाज़।
ढोल की थाप में घुला खेतों का साज,
हर तरफ रंगीं है उत्सव की आज।
संगीत में बंधा ये पूरा परिवार,
खुशियों से भरा, राजस्थानी प्यार।