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टूटे सपनों की कसक 2 by AK music 🎵🎶

SongGPT
टूटे सपनों की कसक 2 by AK music 🎵🎶 - ग़ज़ल music cover art

टूटे सपनों की कसक 2

ग़ज़ल

0:003:15
Lyrics
Description
टूटे सपनों की कसक
हर रात मैं चाँद से शिकायत करता हूँ,
क्यों मेरी तक़दीर में उजाले कम हैं।
ख़्वाब जो संजोए थे दिल के कोने में,
वो टूटे पड़े हैं, कोई संभालने वाला भी कम है。
2. बेबस मोहब्बत
तेरी यादों का दिया रोज़ जलता है,
दिल के हर कोने में उजाला सा रहता है।
पर अफसोस कि वो उजाला मेरे अंधेरों को मिटा नहीं सकता,
तेरी मोहब्बत थी, पर तेरा साथ नहीं था।
3. बिछड़ने का दर्द
कल तक जो लफ्ज़ मेरे थे, वो आज पराये लगते हैं,
जो चेहरा हर पल मेरे साथ था, अब परछाई भी नहीं बनता।
कहते हैं कि वक़्त हर ज़ख़्म भर देता है,
हैं, जो उम्र भर नहीं जाते।