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जिस पथ जाएँ वीर अनेक 2 by SURESH

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जिस पथ जाएँ वीर अनेक 2 by SURESH - rock,male vocals music cover art

जिस पथ जाएँ वीर अनेक 2

rock,male vocals

0:003:59
Lyrics
Description
(Verse 1)
चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में जाऊँ,
ना प्रेमी माला में बँध कर किसी को ललचाऊँ।
सम्राटों के शव पर फूल चढ़ाना न मुझसे,
देवों के सिंहासन पर बैठ कर भाग्य न सँवारूँ।
(Pre-Chorus)
मुझे तोड़ लेना, ओ वनमाली,
फेंक देना उस पथ पर जहां वीरों की छाँव हो।
जहाँ हौसलों की तलवारें चलती हैं बेध कर,
मातृभूमि के लिए दिल न झुकने पाए कभी।
(Chorus)
जिस पथ जाएँ वीर अनेक,
मैं उस राह का सिपाही बनूँ।
बलिदान की आग में जलूँ,
अपनी माटी को नमन करूँ।
शौर्य के गीत मेरे हों,
रणभूमि में गूँजें सदा,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक,
मैं उस राह का सिपाही बनूँ।
(Verse 2)
ना चाहूँ मैं श्रृंगार की जंजीरें पहने,
ना सपनों की माला में बँध कर रह जाऊँ।
मैं वो तूफ़ान हूँ जो बेड़ियाँ तोड़ दे,
मैं वो आवाज़ हूँ जो हर गली में गूंजे।
(Pre-Chorus)
मुझे तोड़ लेना, ओ वनमाली,
फेंक देना उस पथ पर जहां वीरों की छाँव हो।
जहाँ हौसलों की तलवारें चलती हैं बेध कर,
मातृभूमि के लिए दिल न झुकने पाए कभी।
(Chorus)
जिस पथ जाएँ वीर अनेक,
मैं उस राह का सिपाही बनूँ।
बलिदान की आग में जलूँ,
अपनी माटी को नमन करूँ।
शौर्य के गीत मेरे हों,
रणभूमि में गूँजें सदा,
जिस पथ जाएँ वीर अनेक,
मैं उस राह का सिपाही बनूँ।
(Bridge)
ना कोई शोभा, ना कोई माया,
सपनों की वो आग है जो बुझाए न।
वनमाली का आह्वान है ये,
तोड़कर बंधन, बढ़ चल तू वीरों के संग।
(Chorus)
जिस पथ जाएँ वीर अनेक,
मैं उस राह का सिपाही बनूँ।
बलिदान की आग में जलूँ,
अपनी म