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ज़हर में भी ज़िंदगी 1 by SHIVAJI GHUGE (RAJE)

SongGPT
ज़हर में भी ज़िंदगी 1 by SHIVAJI GHUGE (RAJE) - Indian, Ballad,Female Vocals music cover art

ज़हर में भी ज़िंदगी 1

Indian, Ballad,Female Vocals

0:003:40
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
धूप के तीरों से जलते हैं रस्ते,
काँटों की छाँव में छुपे हैं सपने।
भीतर की आग को छुपाते हैं लोग,
मौन की चादर ओढ़े, चल देते हैं लोग।
टूटी हुई कलम से लिखते हैं दास्ताँ,
हर धड़कन में छुपा एक नयी कहानी।
(कोरस)
न जाने कैसे ये दिल सह लेता है,
ज़हर-सा है ये सफ़र, फिर भी जी लेता है।
अंधेरों में भी दीपक जलाए लोग,
टूटकर भी खुद को सँवारते हैं लोग।
(अंतरा 2)
आँधियों की सरगोशी में गुम होते हैं,
पर छुपी हुई उम्मीद की किरण जगाते हैं।
मिट्टी की खुशबू में छुपे हैं जज़्बात,
हर दर्द को छुपाकर मुस्कुराते हैं।
चाँदनी रातों में भीगते हैं ख्वाब,
फिर भी हर सुबह नयी राह बनाते हैं।
(कोरस)
न जाने कैसे ये दिल सह लेता है,
ज़हर-सा है ये सफ़र, फिर भी जी लेता है।
अंधेरों में भी दीपक जलाए लोग,
टूटकर भी खुद को सँवारते हैं लोग।
(ब्रिज - धीमा और भावुक)
सन्नाटे में गूँजती है उनकी दास्ताँ,
काँपती हवाओं में छुपी है उनकी आवाज़।
ज़ख़्मों की परतों के पीछे चमकता है सितारा,
जो हर रात के बाद लाता है सवेरा।
(आउट्रो)
फिर भी चलते हैं, फिर भी लड़ते हैं,
इन खामोशियों में अपनी कहानी कहते हैं।
न जाने कैसे ये दिल सह लेता है,
ज़हर-सा है ये सफ़र, फिर भी जी लेता है।