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ज़ख़्म-ए-इश्क़ 2 by himanshu

SongGPT
ज़ख़्म-ए-इश्क़ 2 by himanshu - soulful,male vocals music cover art

ज़ख़्म-ए-इश्क़ 2

soulful,male vocals

0:003:42
Lyrics
Description
(अंतरा 1)
तेरे शहर में आया था एक ख़्वाब लेकर,
दिल में छुपी थी बस एक ही तस्वीर,
तेरी मुस्कान में छुप गया था जीना,
और तू थी मेरी हर सुबह, हर शाम की तक़दीर...
पर मैं कह न सका, चुप रहा हर दफ़ा,
बस देखता रहा तुझको किसी और के साथ,
एक दिन सुना, तेरे हाथों में मेहंदी थी,
और मेरा दिल टूट गया बिना किसी आह के साथ...
(मुखड़ा)
बेइंतेहा मोहब्बत की थी मैंने तुझसे,
एक पल के लिए भी ख़ुद से कम न समझा,
पर तू किसी और की हो गई,
और मैं सिर्फ़ यादों का आशियाना बन गया...
(अंतरा 2)
मैं वो पत्थर था जो बारिश में रोया,
तेरे नाम के हर हर्फ़ में डूबा रहा,
तेरी शादी के दिन, मैं अकेले मंदिर के पीछे,
अपनी क़िस्मत को जलाता दिया था ख़ुद का...
(ब्रिज)
तेरे सिन्दूर में मेरी बरबादी लिखी थी,
तेरे गहनों में मेरी ख़ामोशी झलकती थी,
और तू मुस्कराई, जैसे कुछ भी न हुआ,
जैसे मैंने कभी तुझसे मोहब्बत ही न की थी...
(मुखड़ा - दोहराव)
बेइंतेहा मोहब्बत की थी मैंने तुझसे,
हर दुआ में तेरा नाम था बस,
पर तू किसी और की हो गई,
और मैं... सिर्फ़ एक पुरानी कहानी बन गया...
(आउट्रो)
अब भी कभी तेरी शादी की तस्वीर देख लूं,
तो आँखों में आँसू, दिल में एक ठंडक सी आती है...
क्योंकि तू खुश है...
और मैं अब भी तुझमें ज़िंदा हूँ,
बेनवा, बेपनाह... मगर वफ़ा में डूबा हूँ...