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जय हो ओंकार सिंह की 2 by Virat

SongGPT
जय हो ओंकार सिंह की 2 by Virat - Inspirational,both vocals music cover art

जय हो ओंकार सिंह की 2

Inspirational,both vocals

0:003:26
Lyrics
Description
अंतरा 1:
धरती का सपूत, परंपरा का दीप,
चारण समाज का, सच्चा प्रतिनिधि।
साहित्य, संस्कृति का जो रखवाला,
लखावत जी जैसा ना कोई निराला।
कोरस:
जय हो ओंकार सिंह की,
जो समाज का अभिमान है!
जहाँ चले वो पथ बना दे,
चारणों की वो शान है!
अंतरा 2:
महासभा की कमान संभाली,
चारणों को नई दिशा दिलवाई।
कवि, विद्वान, वीरों की भूमि,
लखावत जी ने फिर से दी ध्वनि।
कोरस:
जय हो ओंकार सिंह की,
संघर्षों की पहचान है!
वाणी में जिनके अग्नि जली,
हर शब्द में सम्मान है!
अंतरा 3:
राजनीति में भी समाज का साथ,
हर मंच पर रखा सच्चाई का बात।
बाड़मेर से उठी समाज की पुकार,
लखावत जी ने दिया उसे आधार।
कोरस (उच्च लय में):
गूंज उठी है रणभेरी,
चारणों का अभिमान है!
जहाँ खड़े हों लखावत जी,
वहाँ बदलता जहान है!