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जय सत्य की 2 by Sanjay

SongGPT
जय सत्य की 2 by Sanjay - Indian,Male vocals music cover art

जय सत्य की 2

Indian,Male vocals

0:003:36
Lyrics
Description
आज भी दुनिया में बैठे हैं,
सिंहासन पे घमंडी लोग,
आदेशों से दबाते हैं,
कमज़ोरों के सपनों को रोक।
जैसे हिरण्यकश्यप ने सोचा,
मैं ही हूं सबसे बड़ा,
भूल गया था एक सच्चाई,
ऊपर है नारायण खड़ा。
(Chorus)
कितना भी अत्याचार करो,
सच को तुम रोक न पाओगे,
भक्त प्रह्लाद की तरह,
आस्था को मिटा न पाओगे।
जब अन्याय चरम पे पहुंचेगा,
नरसिंह दहाड़ लगाएंगे,
और अत्याचार का हर किला,
क्षण में ढह जाएगा。
(Verse 2)
गुरु, मालिक, नेता, राजा,
सब बन बैठे भगवान,
लाख समझाओ विनम्रता,
फिर भी करते अपमान।
पर इतिहास ने बार-बार दिखाया,
सत्ता का घमंड टूटता है,
जब मासूम की आंखों से,
सत्य का सूरज फूटता है。
(Bridge) (धीरे, भावपूर्ण)
दीवारें चाहे ऊंची हों,
सच की आवाज़ पहुंचेगी,
भय और ज़ुल्म की रातें,
एक दिन सुबह को देंगी。
(Chorus Repeat)
कितना भी अत्याचार करो,
सच को तुम रोक न पाओगे,
भक्त प्रह्लाद की तरह,
आस्था को मिटा न पाओगे।
जब अन्याय चरम पे पहुंचेगा,
नरसिंह दहाड़ लगाएंगे,
और अत्याचार का हर किला,
क्षण में ढह जाएगा。
(Outro)
ये दुनिया भूल न जाए,
सत्ता का नशा सब खा जाए,
पर अंत में जय होती है,
sिर्फ़ सत्य की—
नारायण की…
जय जय जय!