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जय जय सूर्य नारायण 2 by Jagriti

SongGPT
जय जय सूर्य नारायण 2 by Jagriti - World Music,both vocals music cover art

जय जय सूर्य नारायण 2

World Music,both vocals

0:003:53
Lyrics
Description
जय जय सूर्य नारायण, दिनकर देवा प्रकाश,
तेरी किरणों से खिलता, यह जग का हर आकाश।
स्वर्णिम रथ पर बैठे, सात अश्वों की बलवान चाल,
तेरे तेज से मिटता, जीवन का हर जंजाल。
भोर की बेला आते ही, नभ का द्वार खुल जाता,
तेरी स्वर्ण रश्मियों का दीप, जगत में जल जाता।
अरुण सारथी मार्ग बनाता, नभ में नभ-संगीत गूँजता,
तेरे तेज का वर्णन पाकर, वेदों का स्वर भी पूजता।
गंगा-यमुना की लहरें, तेरे चरण पखारती हैं,
सरोवर का हर कमल, तेरी किरणों से निखरती हैं।
पर्वत चोटियाँ रत्नमाल, तेरे रंग में रंग जातीं,
वन-उपवन की हर पत्ती, तेरा ही नाम गाती।
रोग हरो, दुःख हरो, तन-मन को दो बल,
तेरी पूजा से मिलता, जीवन में मंगल फल।
बालक की हँसी, वृद्ध का बल, श्रम का प्रतिफल,
सब तुझसे है, हे भानु, सब तेरा ही संबल।
तप-त्याग के आदर्श, साधु-संत के सखा,
तेरे ध्यान से मिट जाता, हर अज्ञान का दुखा।
अर्चना में अर्घ्य जल, मंत्रों में श्रद्धा-गान,
हे ज्योतिरमय नारायण, तुम धर्म का सम्मान।
छाया और तप की कथा, पुराणों में गाई जाती,
संजीवनी के स्त्रोत तुम, अमृतधारा बहाती।
ग्रह-नक्षत्र का पथ-संचालक, काल का प्रहरी,
तुम्हारे बिना न चले दिन, न बदले कोई पहरी।
हे मित्र, हे भानु, हे रवि, वेद तुम्हें प्रणाम करते,
ऋतु चक्र के नियंता, यज्ञों में तुम्हें आह्वान करते।
तुम्हारी अग्नि से जल तपे, बादल बने आकाश में,
तुम्हारी ही कृपा से वर्षा हो, अन्न उगे प्रकाश में।
किसान के स