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जय कन्हैया 1 by Adarsh

SongGPT
जय कन्हैया 1 by Adarsh - Folk,both vocals music cover art

जय कन्हैया 1

Folk,both vocals

0:003:58
Lyrics
Description
जय-जय जय कन्हैया लाल की,
जय-जय वृन्दावन के लाल की,
माखनचोर, नटवर नागर,
मोहन प्यारे ग्वाल की।
निशा थी अमावस सी गहरी,
मैथुर जेल में कैद अँधियारी,
कंस का भय चारों ओर,
दूर-दूर थी उदासी भारी।
पर तभी गगन से आवाज़ आयी,
"देवकी! तेरा भाग्य जगमगाएगा,
आज स्वयं नारायण तेरे आँगन में,
मानव रूप में खेल रचाएगा।"
देवकी के आँसू मोती बनकर,
धरती पर झर-झर गिरे,
नव प्रभात का स्वागत करने,
स्वयं विष्णु अवतार धरे।
सिर पर मुकुट, पैरों में नूपुर,
माथे पर चंदन की रेखा,
हाथों में शंख-चक्र-गदा,
मुस्कान में माया की लेखा।
नंदलाल को ले गोकुल पहुँचे,
वसुदेव पैरों में तेज बटोरे,
यमुना झुकी, लहरें रुकीं,
देव बालक के चरण निहोरे।
यशोदा के आँगन में जब,
लाडला बाँके बिहारी आये,
दूध-माखन की खुशबू संग,
सारे गोकुल में गीत गाए।
ढोल-नगाड़े बजने लगे,
बृजवासी नाचे-गाए,
"आयो रे, आयो नंद के द्वारे,
शुभ मंगल गान सुनाए।"
गोपियाँ झूम झूम कर आईं,
थाल सजाकर आरती लाई,
"जय हो ललना, जय हो कान्हा,
तुमसे ही यह दुनिया सजाई।"
कभी माखन की हांडी फोड़ें,
कभी ग्वालों संग बंसी बजाएं,
कभी गोद में चढ़कर माँ की,
अंजनिया आँखों से हँस जाएं।
गोपियाँ जब शिकायत लेकर,
नंद बाबा के द्वार आएं,
kahen – "तुम्हारा लाल तो नटखट,
हमारे घर सब माखन खाए।"
नंदलाल हँसकर बोले –
"माखन तो उनका ही हक है,
kyonki वे स्वयं हर दिल में,
prem का माखन पक है।"
gopiyan लजा-लजा मुस्काईं,
man ही man मोहन को चाहें,
prem का बंधन ऐस