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जड़ों की आवाज़ (Adivasi Beti Anthem) by Sujeet

SongGPT
जड़ों की आवाज़ (Adivasi Beti Anthem) by Sujeet - Hip Hop / Indian Rap music cover art

जड़ों की आवाज़ (Adivasi Beti Anthem)

Hip Hop / Indian Rap

0:004:05
Lyrics
Description

[Intro ] मांदर की थाप, साँसों में धूल, लौ के पास की रात पीली मिट्टी की खुशबू, ये कहानी हमारी बात [Pre-Chorus ] सुनो — धड़कन में सवाल है, दिल में हाल है ना चुप करोगे हमको, ना दबेगा ये काल है [Hook] ये प्यार नहीं सौदा सिस्टम का जाल आदिवासी बेटी — सवालों में जड़ों की आवाज़, उठ जा हाल (कह दो: जड़ें बचाओ! — कह दो: जड़ें बचाओ!) [Verse 1] हर कदम पर छाए सवाल, हर घर में एक तमाशा आँगन में चाँदनी, पर नाम बदला नया नजारा मांदर की थाप गूँजे, पर कुछ ताल टूटी है लौ के पास की रातें, अब शहर की सर्दी सूनी है पीली मिट्टी के दाग, हथेली में हैं रहे पहचान के सिले-रिश्ते, धीरे-धीरे टूटते शहर में बहे हक का वार था जब से, आवाज़ में आग जमी हम जो चुप न रहे, तो बात ने ढाल ले ली दिशा ख़मी (पंचलाइन) — जड़े हैं गहरी, पर सवालों से नहीं डरती मिट्टी, हमारी ध्वनि तेज, जैसे मांदर की हर इक ठठ्टी. [Pre-Chorus 2] सोच बदलती नहीं, बस परतें खुलती हैं प्यार के बीच भी, जड़ों का मान जुड़ती हैं [Hook] ये प्यार नहीं सौदा सिस्टम का जाल आदिवासी बेटी — सवालों में जड़ों की आवाज़, उठ जा हाल (कह दो: कौन बचाएगा? — हम खुद! — हम खुद!) [Verse 2] मुद्दा न सिर्फ़ प्यार का, न किसी जात का बैर मुद्दा सोच का है, जड़ों से जो परे घेर रीति-रिवाज के साये, मांदर की वो आवाज़ खोई नाम बदला, रास्ता बदला, पर रूह अपनी ना होई खेतों की खुशबू, नदी की सरल चाल याद आए नाचते कदम, दादी की कहानी — दिल में रह जाए हम कहें नहीं नफ़रत, नहीं खून-खराबा का बुलावा बस चाहते हैं इज़्ज़त — चुनाव में उजाला, समझ का चहावा (पंचलाइन) — प्यार हो जहाँ भी, पर जड़ों का मान भी रहे, इक हक़ की दास्तान हो, तो ज़मीं फिर गीत गाये, गधे। [Pre-Chorus 3] समझो, पूछो, बताओ — आज़ादी के साथ पहचान भी चाहिए संदेहों के बीच, उसके फैसले का वज़न भी चाहिए [Hook] ये प्यार नहीं सौदा सिस्टम का जाल आदिवासी बेटी — सवालों में जड़ों की आवाज़, उठ जा हाल (कह दो: सुनो — उसकी मरज़ी! — सुनो — उसकी मरज़ी!) [Bridge ] ना तलवार, ना नफरत, सिर्फ़ सच का उजाला मांदर की थाप पर, हम गाएँ नया आलम, नया ग़ज़ाला चैन की रातें लौटें, पीली मिट्टी हँसे फिर से हाथ में हाथ दे कर, हमारी जड़ों की रोशनी खिले [Verse 3 — दिशा(समुदाय) की आवाज़] दिशोम बोले—हम भी इंसान हैं, रूह हमारी भी है जन्मी पर पहचान हमारी, संस्कृति हमारी — ये याद में बनी प्यार हो जहाँ भी, पर याद रहे पुरखों का भाव हम बाँटें नहीं जुदाई, हम जोड़ें इज्ज़त का नवाव (पंचलाइन) — ये गीत ना बंदी है, ना शोर बस दिखावे का, ये हमारी दास्तान है — जड़ों की आवाज़, सच की नाव का। [Final Hook / Outro ] ये प्यार नहीं सौदा सिस्टम का जाल आदिवासी बेटी — सवालों में जड़ों की आवाज़, उठ जा हाल (कह दो: जड़ों की आवाज़ — गूंजे हर हाल में!) [Call & Response Tag — Live] रैपर: कहो क्या चाहते हो? क़ॉरस: इज़्ज़त और आज़ादी! रैपर: क्या निभाएगा शहर? क़ॉरस: जड़ों का मान — साथ ही आज़ादी! [Outro ] ये रैप गुस्से से नहीं, जिम्मेदारी से भरा आदिवासी अस्तित्व आज सवालों में खड़ा बेटी भी आज़ाद है, अपनी राह चुनेगी वो सच्ची पर जड़ों का मान बचा कर — चलेंगे हम भी उसी पगड़ी (अंतिम पंक्ति / लाइन-हुक) — जड़ों की आवाज़ — अब मौन नहीं रहेगी, बोल उठेगी.