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गुणों की यात्रा 2 by Rk

SongGPT
गुणों की यात्रा 2 by Rk - Indian,both vocals music cover art

गुणों की यात्रा 2

Indian,both vocals

0:003:25
Lyrics
Description
अंतरा 1:
जीवात्म के भीतर छिपी,
दो ऊर्जा की बात…
एक दैविक, प्रेम की सरिता,
एक आसुरी रात…
दैविक दे प्रकाश का दीपक,
सतपथ की पहचान…
आसुरी मोह के बंधन बाँधे,
भुला दे प्रभु का नाम…
सहगान:
अरे भाई, मन के भीतर देख,
कौन-सा है गुण जागा…
दैविक से हो जीवन उजला,
आसुरी अंधियारा लागा…
अंतरा 2:
सतगुण दे शांति का संदेशा,
ज्ञान-वैराग्य का मान…
रजोगुण दौड़ लगवाए,
लोभ-मोह का गान…
तमोगुण नींद में डुबोए,
भुला दे सतमार्ग…
तीनों गुण के संग-संग चलना,
बड़ा कठिन है भार…
सहगान:
अरे भाई, मन के भीतर देख,
कौन-सा है गुण जागा…
दैविक से हो जीवन उजला,
आसुरी अंधियारा लागा…
अंतरा 3 (उपदेश भाव):
सतगुण को अपना ले मन में,
रज-तम से हो दूर…
दैविक शक्ति को साध ले साधो,
यही है जीवन सूर…
कबीर कहे, ये भेद समझ लो,
तभी पार उतरोगे…
दैविक प्रेम की नाव चढ़ोगे,
मोक्ष धाम को पाओगे…
अंतिम सहगान:
अरे भाई, मन के भीतर देख,
कौन-सा है गुण जागा…
दैविक से हो जीवन उजला,
आसुरी अंधियारा लागा…