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ग़म-ए-हुसैन 1 by Rehman

SongGPT
ग़म-ए-हुसैन 1 by Rehman - Spiritual,both vocals music cover art

ग़म-ए-हुसैन 1

Spiritual,both vocals

0:003:20
Lyrics
Description
हुसैन की प्यास बोलती रही, फुरात की ख़ामोशी रोती रही। जिसने भी देखा कर्बला का समाँ, उसकी आँखें कहती रहीं – "वो सच्चा इमाम था।"
(बंद 2)
ताज पहनते नहीं थे जो तख़्तों के लिए, सर कटाया मगर झुके नहीं ज़ुल्म के लिए। नन्हा अली असग़र भी हक़ पे गया, तीर आया, मगर सब्र ना गया।
(बंद 3)
खेमों में जलते हुए थे अश्कों के दिए, हर रूह कह रही थी – "हुसैन हमारे लिए।" वो जंग नहीं थी बस मिट्टी की कहानी, वो थी इस्लाम की अमर निशानी।
(बंद 4)
हर साल जब आए मोह़र्रम का महीना, दिल से उठे नाम हुसैन और बीबी सकीना। नसीब वालों को मिलता है ग़म-ए-हुसैन, जैसे दिल को मिल जाए पाक-सा चैन.