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खोल रही हूँ यहाँ 2 by Prasad

SongGPT
खोल रही हूँ यहाँ 2 by Prasad - Indian Fusion,female vocals music cover art

खोल रही हूँ यहाँ 2

Indian Fusion,female vocals

0:003:25
Lyrics
Description
(Intro - Spoken Word)
खोल रही हूँ यहाँ, जज़्बातों के दरवाज़े,
जहाँ मौन भी बोल उठता है, और खामोशी में गूंजती हैं आवाज़ें।
(Verse 1)
हां, खोल रही हूँ यहाँ, उन भावनाओं के पन्ने,
जहाँ छुपे हैं सवाल, और जवाब हैं कभी अधूरे।
सुख करवा दी ले लेती, ध्यान देते ही बने,
हर एहसास की परतें खोलती, जो कभी दिखीं नहीं थे कहीं।
(Pre-Chorus)
रंगों से परे, संवेदनाओं के सागर में,
डूबती हूँ मैं, खोजती हूँ अपनी परछाई।
(Chorus)
खोल रही हूँ यहाँ, दिल की अनकही बातें,
जहाँ खुशियाँ भी छुपी हैं, और आंसुओं की बरसातें।
ले लेती ध्यान, बनती हूँ मैं कहानी,
सुख-दुख के संगम में, रंग भरती अपनी जवानी।
(Verse 2)
धड़कन की इस भाषा में, अनसुनी सी धुन है,
जहाँ दर्द भी मुस्कुराता है, और खुशियाँ भी गुनगुनाती हैं।
रुकावटों को तोड़ती, नियमों से बाहर निकलती,
खोल रही हूँ यहाँ, अपनी दुनिया की सच्चाई।
(Bridge - Experimental)
(Whispered overlapping with melody)
ध्यान के उस पल में, जब सब कुछ थम जाता है,
वो खुलापन, वो छूटापन, जो असली होता है।
(Chorus)
खोल रही हूँ यहाँ, दिल की अनकही बातें,
जहाँ खुशियाँ भी छुपी हैं, और आंसुओं की बरसातें।
ले लेती ध्यान, बनती हूँ मैं कहानी,
सुख-दुख के संगम में, रंग भरती अपनी जवानी।
(Outro)
हां, खोल रही हूँ यहाँ, जज़्बातों के दरवाज़े,
जहाँ हर एहसास है अनमोल, और हर लम्हा है सच्चा।