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खुद से मिलने की राह 2 by Lavish

SongGPT
खुद से मिलने की राह 2 by Lavish - Indie Pop,both vocals music cover art

खुद से मिलने की राह 2

Indie Pop,both vocals

0:003:05
Lyrics
Description
चल पड़ा हूँ मैं अकेला, भीड़ से कुछ दूर अब,
ना कोई शिकवा, ना गिला, बस सुकून की है जुस्तजू अब。
दोस्ती के किस्से पीछे, रिश्तों की वो गहराई,
अब हर मोड़ पे खुद से ही, इक नई बात है आई।
रास्ते पूछते हैं मुझसे, मंज़िल तुझसे दूर क्यों है?
मैं हँस के कहता हूँ यारों, तू बंधन से भरपूर क्यों है?
आज़ादी की पगडंडी है, दिल से निकली पुकार,
चल पड़ा हूँ मैं अकेला, छोड़ के दुनिया का प्यार।
घर की दीवारें रोती हैं, माँ की ममता पुकारे,
पर ख्वाबों की उड़ान लिए, ये पाँव ना रुकें सारे।
कभी थक जाऊँ तो यादें, इक चादर बन जाएं,
पर फिर भी दिल ये चाहे, बस दूर तलक उड़ जाएं।
रास्ते पूछते हैं मुझसे, मंज़िल तुझसे दूर क्यों है?
मैं हँस के कहता हूँ यारों, अब बंधन से भरपूर क्यों है?
आज़ादी की पगडंडी है, दिल से निकली पुकार,
चल पड़ा हूँ मैं अकेला, छोड़ के दुनिया का प्यार।
शायद कभी लौट आऊँ, जब मन फिर से भरे,
अभी तो बस उड़ना है, जब तलक ये दिल कहे।
ना मजबूरी, ना डर है, ना कोई भारी भार,
बस खुद से मिलने निकला हूँ, दूर जहाँ हो संसार।