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ख़ामोशी की आवाज़ 1 by Rocky

SongGPT
ख़ामोशी की आवाज़ 1 by Rocky - Contemporary Hindi Emotional,Male Vocals music cover art

ख़ामोशी की आवाज़ 1

Contemporary Hindi Emotional,Male Vocals

0:003:49
Lyrics
Description
[Verse 1]
मैंने सबको अपना समझा, पर कोई मेरा निकला नहीं।
मैंने सबको थामा हुआ था, पर किसी ने मुझे थामा नहीं।
साथ चलते थे, पर साथ खड़े रहे नहीं।
रिश्ते थे सच्चे, पर सच कभी रहे नहीं।
मैं टूटता गया, पर आवाज़ बनाइ रखी।
मैं रोता गया, पर हँसी उठाई रखी।
अब समझ आया मुझे, कौन मेरे साथ था और कौन नहीं।
लोग साथ चलते नहीं, बस उस जगह तक चलते हैं,
और उस जगह पर छोड़ जाते हैं,
जहाँ हम सबसे ज़्यादा कमज़ोर हो जाते हैं।
[Chorus]
मैं टूटता गया, पर आवाज़ बनाइ रखी।
मैं रोता गया, पर हँसी उठाई रखी।
अब समझ आया मुझे, कौन मेरे साथ था और कौन नहीं।
लोग साथ चलते नहीं, बस उस जगह तक चलते हैं,
और उस जगह पर छोड़ देते हैं,
जहाँ हम सबसे ज़्यादा कमज़ोर हो जाते हैं।
[Instrumental Break]
(Strings swell into chorus; subtle electric guitar fills)
[Verse 2]
खामोशी मेरी अब भाषा बन गई,
तन्हाई मेरी हर साँस बन गई।
जो सपने आँखों में पाल के रखे,
वो टूटी हुई इक आस बन गई।
शीशे सा दिल था, चुपचाप टूट गया,
भीतर का दर्द लफ़्ज़ों में छूट गया।
जिसे अपना समझ के दिल दे बैठे,
वो ही सबसे पहले रूठ गया।
अब मैं खुद से ही बातें करता हूँ,
हर रात अकेले जागा करता हूँ।
भीड़ में रहकर भी तन्हा रहता हूँ,
खुद को ही चुपचाप सिखाया करता हूँ।
[Chorus — Repeat]
मैं टूटता गया, पर आवाज़ बनाइ रखी।
मैं रोता गया, पर हँसी उठाई रखी।
अब समझ आया मुझे, कौन मेरे साथ था और कौन नहीं।
लोग साथ चलते नहीं, बस उस जगह तक चलते हैं,
और उस जगह पर छोड़ देते हैं,
जहाँ हम सबसे ज़्या