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खंडहर की यादें 2 by Punit

SongGPT
खंडहर की यादें 2 by Punit - Soft Pop,both vocals music cover art

खंडहर की यादें 2

Soft Pop,both vocals

0:003:32
Lyrics
Description
(verse)
यह जो खंडहर है-
लगता तो है बेजान सा...
बेजान ककई ईंटों की बेजान दीवारें,
बेजान धन्नीयों पे टिकी बेजान सी छत।
पर स्मृति के आईने से जरा धूल हटाकर देखो
हर ईंट बोल रही है,
हर धन्नी गुनगुना रही है,
दालानो में गौरैया की चहचहाहट
अभी भी गूंज रही है।
हर कोना बचपन की हर किलकारी
हर शरारत को आज भी अपनी बाहों में समेटे हुए कुछ फुसफुसा रहा है।
आज भी छुपम छुपाई को पुकारता.
(chorus)
खड़ा हूं मैं वहां, जहां बीता मेरा बचपन,
नाना नानी का वो आंगन
हर दीवार, हर कोना, हर सीढ़ी, है अपनी कहानी के क़िरदार।
(verse)
साँझ ढले कभी होती थी यहां छत पे हंसी ठिठोली,
फुर्सत में होती नाना की कहानियां, वो नानी थपकियां वो लोरी वो कहानियां।
(chorus)
नाना के किस्सों में होती थी दुनिया की बातें,
वो मद्रास की बातें,
वो जीवन से यारी के किस्से,
वो एमजीआर की कहानियां,
वो बंबई के किस्से,
वो सेलम के चर्चे,
वो आजादी की कहानियां,
वो अंग्रेजों के किस्से।
नानी के आँचल में छुपा था
स्नेह का संसार विशाल।
(bridge)
धूप में तपती मुंडेरें,
वो मुंडेरों से पतंग,
बरसात में रिसती छतें,
वो आले का दिया,
वो इंद्रोजा,
वो दालाने,
वो ग्रामोफोन,
वो हारमोनियम,
वो तांबे की हौद,
वो नानी का पानदान,
सब थे कहानी के किरदार।
(outro)
अब देखो — खिड़कियाँ मौन हैं, आँगन भी खाली सा, दालान भी है खाली, गौरैया भी भूल गई रास्ता। पर हर कोने से झाँक रहा है बचपन — बिना कहे, सब कुछ सा।
dिवार की वो खूंटी जिसप