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कृष्ण: ब्रह्म का घोष 2 by Prajwal

SongGPT
कृष्ण: ब्रह्म का घोष 2 by Prajwal - Dark Folk Devotional,Male (Deep, Commanding) Vocal music cover art

कृष्ण: ब्रह्म का घोष 2

Dark Folk Devotional,Male (Deep, Commanding) Vocal

0:003:32
Lyrics
Description
[Intro]
(गहरा ड्रोन्, दबा हुआ रुद्र-ठपक, दूर से शंख की धमक)
मैं बोलूँ—सुनो, सृष्टि मेरी तख्ती है।
मैं वही हूँ जो दिशा बदल दे, समय मोड़ दे।
[Verse 1]
देखो—मेरी छाया तल पर है, कदम मेरे लेख हैं।
तुम्हारी चालें मेरे पटल पर लिखी हैं, क्रिया मेरे लेखा में।
मैं गति को मोड़ दूँ, मैं विधि का लेख हूँ;
जो अँधेरे में शांत दिखे, वही सबसे भयंकर शंख हूँ।
[Pre-Chorus]
चेतो—यह कोई लोरी नहीं, यह चेतावनी है।
जो मूर्खता करे, उसका हिसाब ठियों होगा।
भक्त मेरा, छाया मेरे पास—दोषी का भी अंत आस-पास।
[Chorus]
मैं कृष्ण — काल का घोष, सुनो।
मैं कृष्ण — गति का लेख, सुनो।
भक्त को बचाऊँ, दुष्ट को ध्वस्त कर दूँ।
सुनो — तुम्हारी साँसें मेरे निधि।
(हुक: बोल-चमकीले, बार-बार दोहराना)
[Verse 2]
तारों की कड़ी मेरे अंगूठे की तर्ज़ पर झूलती है;
नदियाँ मेरे कानों में गूँजती, पर्वत मेरी यादों के पैरों तले काँपते।
मैं रण में सीधा गणना कर दूँ, मैं समय का हिसाब काट दूँ।
जो मेरी मर्यादा लांघे, उसे मैं रात्रि में गूँथ कर रख दूँ।
[Pre-Chorus]
समझो — ये लीला नहीं, ये आदेश है।
मेरी दृष्टि पर सब कर्म आते हैं, धोखा नहीं चलता यहाँ।
जो झूठ बोले, उसका नृत्य रात में रौरव बनकर लौटेगा।
[Chorus]
मैं कृष्ण — काल का घोष, सुनो।
मैं कृष्ण — गति का लेख, सुनो।
भक्त को बचाऊँ, दुष्ट को ध्वस्त कर दूँ।
सुनो — तुम्हारी साँसें मेरे निधि।
[Bridge]
(शंख फूँक—रुद्र नगाड़ों का जाल)
मैं शंख बजाऊँ—धरती काँपे, आका