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काल और कर्म की गूँज 1 by Krishnankant

SongGPT
काल और कर्म की गूँज 1 by Krishnankant - Indian Classical Fusion music cover art

काल और कर्म की गूँज 1

Indian Classical Fusion

0:002:40
Lyrics
Description

[Verse 1] काल बोलता है, हर पल की साक्षी बन, घड़ी-घड़ी में लिखता, जीवन का लेखा-जोखा। कल जो हँसा था गर्व से, आज रोता है वही, काल का चक्र सबको नंगा कर दिखाता है यही। कर्म बोलता है, चुपके-चुपके, बिना शब्द के, जो बोया तूने संसार में, वही फल तोड़ेगा रे। पुण्य का बीज रोपा तो अमृत मिलेगा, पाप का बोया तो विष का प्याला पिएगा। [Chorus] काल बोलता है... कर्म बोलता है... सत्य की ज्योति, झूठ का अंत यही बताता है। काल बोलता है... कर्म बोलता है... जो किया तूने, वही लौट-लौट आता है। [Verse 2] सूरज उगता प्रातः, ढलता शाम के अंधियारे में, जो गद्दारी करता, गिरता है धूल में आखिर। कोई माफी नहीं कर्म के लेखे में, काल साक्षी खड़ा, सब हिसाब बराबर करेगा। धर्म की राह चले तो सुख की छाया मिले, अधर्म की ओर मुड़े तो दुःख का सागर मिले। लोभ, क्रोध, मोह के बंधन तोड़ दे, काल और कर्म साथ मिल, मुक्ति का द्वार खोल दे। [Chorus] काल बोलता है... कर्म बोलता है... सत्य की ज्योति, झूठ का अंत यही बताता है। काल बोलता है... कर्म बोलता है... जो किया तूने, वही लौट-लौट आता है। [Bridge - Fast Flow] हे मानव, सुन ले यह पुरातन वाणी, आज जो करता है, कल उसी का फल पाएगा। समय की धारा बहती, कर्म का चक्र घूमता, सत्य की राह पर चले तो अमर हो जाएगा। [Chorus] काल बोलता है... कर्म बोलता है... सत्य की ज्योति, झूठ का अंत यही बताता है। काल बोलता है... कर्म बोलता है... जो किया तूने, वही लौट-लौट आता है। [Outro] अतः रे प्राणी, अपना कर्म साफ़ रख, काल बोल रहा है, कर्म गूँज रहा है। जो बोया, वही काटना पड़ेगा, धर्म में रह, सत्य बोल, यही जीवन का सार है।