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कांच के ख्वाब 2 by Abdhesh

SongGPT
कांच के ख्वाब 2 by Abdhesh - Indian, Ballad,Male Vocals music cover art

कांच के ख्वाब 2

Indian, Ballad,Male Vocals

0:003:47
Lyrics
Description
(Verse 1)
कांच के ख्वाब थे जो हमसे टूटे,
चमकते थे वो आसमां में कहीं दूर,
तुम्हारी हँसी में बसी थी एक दुनिया,
अब वो दुनिया है धुंधली और पुरानी।
(Pre-Chorus)
तेरे जाने से जैसे खामोशी छा गई,
मेरी तन्हाई में तेरी आवाज़ गुम हो गई।
पर दिल की किताब में एक पन्ना बचा है,
जहाँ तेरे बिना भी मैं खुद से मिला हूँ।
(Chorus)
क्यों तू गया, छोड़ के मुझे,
मेरे जज़्बातों को तूने तोड़ा,
पर मैं फिर भी खड़ा हूँ यहाँ,
अपने आँसुओं से खुद को धो रहा।
कांच के ख्वाबों को सँभालूँ मैं,
तेरे बिना भी जीना सीख लूँ मैं।
(Verse 2)
रातों की चादर तन्हा ओढ़ लेता हूँ,
तेरी यादों के दीयों को जलाता हूँ,
हर दर्द में ढूँढ़ता हूँ एक आस,
कि फिर से लौट आएगा वो खास।
(Pre-Chorus)
तेरे वादों की परछाइयाँ दूर होती हैं,
पर मेरी उम्मीदें अब भी जिंदा रहती हैं।
तू मेरा था, पर कभी मेरा न हो पाया,
अब मैं खुद से प्यार करना सीख गया।
(Chorus)
क्यों तू गया, छोड़ के मुझे,
मेरे जज़्बातों को तूने तोड़ा,
पर मैं फिर भी खड़ा हूँ यहाँ,
अपने आँसुओं से खुद को धो रहा।
कांच के ख्वाबों को सँभालूँ मैं,
तेरे बिना भी जीना सीख लूँ मैं।
(Bridge)
टूटे दिल के टुकड़े जोड़ूँ मैं,
अपनी तन्हाई से दोस्ती कर लूँ,
तेरे बिना ये सफ़र मेरी कहानी है,
जिसमें अब मैं खुद को समझ लूँ।
(Chorus)
क्यों तू गया, छोड़ के मुझे,
मेरे जज़्बातों को तूने तोड़ा,
पर मैं फिर भी खड़ा हूँ यहाँ,
अपने आँसुओं से खुद को धो रहा।
कांच के ख्वाबों को सँभालूँ मैं,